भारतीय संविधान हिन्दी में, Constitution of India

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भारतीय संविधान हिन्दी में, भारतीय संविधान की बात की जाए तो हम सब इस बात को जानते है की हमारे देश को आज़ाद हुए आज 70 वर्ष हो चुके है और उसी के बाद यानि की 26 जनवरी 1950 को हमारे देश का संविधान शुरू हुआ था। बहुत से महान और प्रसिद्ध नेताओं ने इस संविधान को शुरू करने के बहुत प्रयास किये लेकिन अंत में सफ़लता बाबा साहेब अम्बेडकर जी को हासिल हुई। इन्हीं के कारण हमारे देश में आज संविधान चल रहा है।

बी एन राउ को 1946 में भारतीय संविधान तैयार करने के लिए संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया था। वह संविधान के लोकतांत्रिक ढांचे की सामान्य संरचना के लिए जिम्मेदार थे और फरवरी 1948 में अपना प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार किया था। इस ड्राफ्ट पर 26 नवंबर 1949 को भारत की संविधान सभा द्वारा बहस, संशोधित और अंततः लागु किया गया था
डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर- चेयरमैन ड्राफ्टिंग समिति, 25 November 1949

विधानसभा की 14 अगस्त 1947 को बैठक में विभिन्न समितियों के गठन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। ऐसी समितियों में मौलिक अधिकारों, संघ शक्ति समिति और केंद्रीय संविधान समिति पर एक समिति शामिल थी। 29 अगस्त 1947 को, ड्राफ्टिंग कमेटी नियुक्त की गई, डॉ बी आर अम्बेडकर के साथ अध्यक्ष के रूप में छह अन्य सदस्यों के साथ संवैधानिक सलाहकारो ने मिलकर इस संविधान को पूर्ण रूप से स्थापित किया

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जवाहरलाल नेहरू भारतीय सविंधान पर हस्ताक्षर करते हुए

कुल सदस्य पंडित गोविंद बल्लभ पंत, कनैयालल मेनकलाल मुंशी (केएम मुंशी, पूर्व गृह मंत्री, बॉम्बे), अलादी कृष्णास्वामी अय्यर (पूर्व-वकील जनरल, मद्रास राज्य), एन गोपालस्वामी अयंगार (पूर्व प्रधान मंत्री, जम्मू-कश्मीर और बाद के सदस्य नेहरू कैबिनेट), बीएल मिटर (पूर्व वकील जनरल, भारत), मोहम्मद सादुल्ला (असम के पूर्व मुख्यमंत्री, मुस्लिम लीग सदस्य) और डीपी खेतान (खेतान बिजनेस परिवार और एक प्रसिद्ध वकील का शेर)। संवैधानिक सलाहकार सर बेनेगल नरसिंग राउ (जो अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में पहला भारतीय न्यायाधीश बन गया, 1950-54)। बाद में बीएल मिटर ने इस्तीफा दे दिया और माधव राव (वडोदरा के महाराजा के कानूनी सलाहकार) द्वारा प्रतिस्थापित किया गया। डी पी खेतान की मौत पर, टी टी कृष्णमचारी को ड्राफ्टिंग समिति में शामिल किया गया था। समिति द्वारा एक ड्राफ्ट संविधान तैयार किया गया था और 4 नवंबर 1947 को विधानसभा में प्रस्तुत किया गया था, जिस पर बहस हुई थी और 2000 से अधिक संशोधन दो साल की अवधि में स्थानांतरित हो गए थे। आखिरकार 26 नवंबर 1949 को, प्रक्रिया पूरी हो गई और संविधान सभा ने संविधान अपनाया। 284 सदस्यों ने दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए और संविधान बनाने की प्रक्रिया पूरी हो गई। इस दिन को राष्ट्रीय कानून दिवस या संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है, और भारतीय कानून व्यवस्था प्रणाली और भी मजबूत हो गयी, Source:Wikipedia

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शुरुवात से लेकर संविधान बनने तक कुल मिलाकर 2 साल 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था। हमारे देश के इस संविधान को पूरे विश्व का सबसे बड़ा संविधान कहा जाता है। इसे पूर्ण करने से पहले लगभग 60 देशों के संविधान पर अनुसंधान किया गया था तभी जाकर हमारे देश का संविधान पूर्ण हुआ था। भारत के संविधान में कुल 448 आर्टिकल्स और 25 सेक्शन्स होते है।

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भारत के संविधान को बनाने का एक सबसे बड़ा उददेश्य यह भी है की इससे यह बात साफ होती है की इस देश का हर एक नागरिक पूरी तरह से आज़ाद है और उन्हें अपने निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार है साथ ही किसी बाहर की कोई भी निति का यहाँ कोई हाथ नहीं है। जैसा की हमारा देश पूरी तरह से स्वतंत्र है उसी तरह यहा के हर एक नागरिक को अधिकार है की वो किसी भी जाती या अन्य भेद भाव के अलावा अपने अधिकारों को प्राप्त करे और अपना जीवन व्यतीत करे।

जिस समय इस संविधान का समापन हुआ उस समय वहाँ 284 सदस्य उपस्तिथ थे और उन सभी के हस्ताक्षर के बाद ही संविधान को मंजूरी दी गई थी। संविधान लागू करने से 2 दिन पहले यानि कि 24 जनवरी 1950 को हमारे राष्ट्रीय गान (जन-गन-मन) को रबीन्द्रनाथ टैगोर जी द्वारा शुरू किया गया था। भारत के संविधान के बारे में बताने का हमारा उदेश्य केवल इतना है की सभी नागरिक इसके बारे में जानकारी रख सके और जरुरत के समय इसका इस्तेमाल कर सके।

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