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इंदौर पुलिस पहुंची सागर, नगर निगम में छानबीन शुरू, श्वेता, आरती ने कौन-कौन से लिए टेंडर जुटा रही जानकारी

भोपाल। प्रदेश के सबसे चर्चित हनी ट्रैप मामले के तार सागर और छतरपुर से जुड़े होने को लेकर इंदौर पुलिस ने सागर में छानबीन शुरू कर दी है। सोमवार को इंदौर पुलिस ने नगर निगम सागर से आरोपी श्वेता जैन और आरती दयाल द्वारा लिए गए टेंडर, कांट्रेक्ट, सब कांट्रेक्ट और पेटी कांट्रेक्ट के दस्तावेज मांगे हैं।

पलासिया पुलिस ने आरोपी श्वेता द्वारा संचालित एनजीओ के माध्यम से जो काम लिए गए हैं। उनकी भी डिटेल मांगी है। इंदौर पुलिस मामले में जानकारी लेने के लिए सोमवार को नगर निगम पहुंची थी। बताया जा रहा है कि निगम को यह जानकारी जल्द से जल्द इंदौर पुलिस के लिए सौंपना है। यही कारण है कि इंदौर पुलिस अभी सागर में ही है। हालांकि उनके रुकने आदि को लेकर गोपनीयता बरती गई है। पुलिस ने निगम को एक पत्र सौंपा है। इसमें हनी ट्रैप मामले की दो आरोपियों और उनके भाईयों द्वारा निगम से कौन-कौन से टेंडर लिए हैं इसकी जानकारी मांगी है। 

महिला जागृति मंच नहीं बल्कि महिला जागृति कला मंच के नाम से है श्वेता का एनजीओ : पुलिस ने सागर नगर निगम को जो पत्र सौंपा है। उसमें श्वेता पति विजय जैन के एनजीओ महिला जागृति मंच का भी उल्लेख है। हालांकि इस नाम से सागर में कोई एनजीओ रजिस्टर्ड नहीं है। श्वेता महिला जागृति कला मंच के नाम से एनजीओ संचालित करती है। जिससे वर्ष 1996 में रजिस्टर्ड कराया गया था।

यह है एनजीओ की डिटेल

  • नाम : महिला जागृति कला मंच
  • यूनिक आईडी ऑफ वो/एनजीओ – एमपी/2014/0082904
  • चेयरमैन – श्वेता जैन 
  • एनजीओ का प्रकार – (सामाजिक)
  • पंजीकरण संख्या – ss1447
  • पंजीकरण का शहर – सागर
  • पंजीकरण की अवस्था – मप्र 
  • पंजीकरण की तिथि – 26-03-1996
  • पता – महावीर मार्केट तीन बत्ती, सागर 

पीडब्ल्यूडी, एनयूएलएम, ई-योजना और लेखा से मांगी गई डिटेल

  • पलासिया पुलिस ने नगर निगम सागर के पीडब्ल्यूडी, एनयूएलएम, ई-योजना और लेखा शाखा से टेंडर आदि की पुरानी डिटेल मांगी है। इसमें श्वेता जैन का भाई राजा जैन और आरती दयाल का भाई कृष्णा अहिरवार द्वारा लिए गए कामों और एनजीओ (महिला जागृति मंच) को वर्षों पहले मिले टेंडर की जानकारी शामिल है।
  • नगर निगम की लेखा शाखा ने पुलिस के पत्र का जवाब भी सौंप दिया है। हालांकि लेखा शाखा ने अपना जवाब गोल-मोल घुमाकर दिया है। जिसमें लिखा है कि एनजीओ महिला जागृति मंच का पुराना कोई बकाया नहीं है। जबकि पुलिस के पत्र में उल्लेख है कि संबंधित आरोपियों या उनके परिजनों के द्वारा लिए गए टेंडर की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। बकाया है या नहीं इसकी बात कहीं लिखी ही नहीं। अब तीन अन्य विभागों की जानकारी देना बाकी है।

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