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इलेक्टोरल बॉन्ड की योजना एक साजिश, इसे गैंगस्टर भी डोनेट कर सकता है: गुलाम नबी आजाद

  • इलेक्टोरल बॉन्ड इस वादे के साथ जारी होता है कि डोनर राजनीतिक पार्टियों का नाम नहीं बता सकते: आजाद
  • संसद में आजाद ने इलेक्टोरल बॉन्ड पर सरकार से जानकारी मांगी, प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने बुधवार को संसद में इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे पर केंद्र सरकार की आलोचना की। आजाद ने कहा- यह योजना एक साजिश है। इस योजना को लागू करने से पहले चुनाव आयोग और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी आपत्ति जताई थी।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘इलेक्टोरल बॉन्ड इस वादे के साथ जारी किया जाता है कि डोनर को अपनी पहचान उजागर नहीं करनी होगी। राजनीतिक पार्टियां भी डोनर की पहचान नहीं बता सकती। इसका भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने विरोध किया था। आरबीआई ने कहा था कि इससे मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा मिलेगा।’’

चुनाव आयोग ने भी इलेक्टोरल बॉन्ड का विरोध किया था: आजाद

आजाद ने कहा, ‘‘इस योजना में राजनीतिक पार्टियों को फंड देने वाले का खुलासा नहीं होता। पैसे कोई फ्रॉड यहां तक कि गैंगस्टर भी डोनेट कर सकता है। चुनाव आयोग ने भी इसका विरोध किया था। आयोग ने कहा था कि इससे डोनेशन की पारदर्शिता खत्म कर होगी। फर्जी कंपनियों के माध्यम से राजनीतिक पार्टियां काले धन का इस्तेमाल करेंगी।’’

आजाद ने संसद में सरकार से भी मांगी बॉन्ड डोनर्स की जानकारी

आजाद ने प्रश्न काल में सरकार से इलेक्टोरल बॉन्ड्स पर जानकारी मांगी। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। हम आज जो बात कर रहे हैं, वो सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ी है। भाजपा सरकार देश में 90 प्रतिशत व्यापार सिर्फ कुछ उद्योगपतियों के साथ चला रही है।

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