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ग्वालियर – मेहरागांव में बिजली के खंभे ने जोड़ रखा है रिश्तों का कनेक्शन, इसी पर टांगे जाते हैं खुशी और गम के कार्ड

  • यहां होने वाली शाादी या गमी के कार्ड-कार्ड घर-घर जाकर नहीं दिए जाते हैं बल्कि गांव में ही एक खंभे पर एक कार्ड टांग दिया जाता है
  • लोग इस खंभे पर नियमित रूप से पहुंचते हैं और कार्ड पढ़कर तय तिथि को न्योते में भी पहुंचते हैं

दर्पण कॉलोनी और शकुंतलापुरी से जुड़ा मेहरा गांव 25 साल पुरानी एक परंपरा की वजह से खास बन गया है। दरअसल, यहां होने वाली शाादी या गमी के कार्ड-कार्ड घर-घर जाकर नहीं दिए जाते हैं बल्कि गांव में ही एक खंभे पर एक कार्ड टांग दिया जाता है, जिसमें पूरे गांव का निमंत्रण लिखा होता है। लोग इस खंभे पर नियमित रूप से पहुंचते हैं और कार्ड पढ़कर तय तिथि को न्योते में भी पहुंचते हैं।


बुजुर्गों का कहना है कि गांव में लगभग 4 हजार की जनसंख्या है। 25 साल पहले खंभे पर शादी का कार्ड टांगे जाने की परंपरा शुरू हुई थी। इससे पहले यहां पर एक चबूतरा था और उस पर गांव के बुजुर्गों की बैठक रहती थी। जिंदगी की दौड़-भाग में बैठक कम हुई तो इसके नजदीक बने चबूतरे को ही रिश्तों के कनेक्शन बनाए रखने के लिए तय कर दिया गया। तब से ही यह खंबा बिजली के साथ रिश्तों का भी कनेक्शन बनाए हुए है।

गांव में रहने वाले दिलीप सिंह यादव ने बताया कि हम लोग 25 साल से खंभे पर कार्ड टांगे जाने की परंपरा देख रहे हैं यह हमारे बुजुर्गों ने शुरू की थी। 

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