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जंगलों में घूमने, बाइक और डॉग के शौकीन हैं नए सीजेआई जस्टिस बोबडे, टेनिस के बेहतरीन खिलाड़ी भी रहे

  • सुप्रीम कोर्ट के 47वें चीफ जस्टिस के रूप में जस्टिस शरद अरविंद बोबडे 18 नवंबर को पदभार ग्रहण करेंगे
  • बोबडे आधारकार्ड को लेकर महत्वपूर्ण फैसला देने वाली चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच में शामिल रह चुके हैं

सुप्रीम कोर्ट के 47वें चीफ जस्टिस के रूप में जस्टिस शरद अरविंद बोबडे 18 नवंबर को पदभार ग्रहण करेंगे। जस्टिस बोबडे के करीबी बताते हैं कि वे बहुत ही खुशमिजाज और मृदुभाषी हैं। वे जमीन से जुड़े हुए व्यक्ति हैं। वे अधिकांश मामलों में वकीलों से ज्यादा से ज्यादा सवाल करते हैं। जस्टिस बोबडे को बाइक राइडिंग और डॉग्स बहुत पसंद है।

हार्ले डेविडसन चलाते वक्त घायल हो गए थे

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील डाॅ. आदिश चंद्र अग्रवाल बताते हैं कि जस्टिस बोबडे को बाइक राइडिंग से बेहद लगाव है। उनकी पसंदीदा बाइक रॉयल एनफील्ड कंपनी की बुलेट है। वे अक्सर उसे खुद ही चलाते हुए दिख जाते हैं। इस साल की शुरुआत में वह हार्ले डेविडसन बाइक की टेस्ट ड्राइव कर रहे थे कि अचानक बाइक स्लिप हो गई और वे दुर्घटना का शिकार हो गए थे। बाइक से गिरने के कारण जस्टिस बोबडे के टखने में काफी चोट आई थी। जिसकी वजह से वह काफी समय तक सुप्रीम कोर्ट में ड्यूटी पर नहीं आ सके थे। कॉलेजियम की बैठकों में भी भाग नहीं ले पाए थे। इसके अलावा उन्हें खाली समय में किताबें पढ़ना पसंद है। वे घर पर बेहद सादगी से रहते हैं और यही सादगी उनकी हर जगह देखने को मिलती है।


जस्टिस बोबडे 23 अप्रैल 2021 तक चीफ जस्टिस के पद पर बने रहेंगे। जस्टिस बोबडे आधार कार्ड को लेकर महत्वपूर्ण फैसला देने वाली चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच में शामिल रहे हैं। इन्होंने अपने फैसले में कहा था कि आधार कार्ड के बिना कोई भी भारतीय मूल सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। इसके अलावा इन्होंने ही पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर लगे आरोपों पर सुनवाई कर उन्हें क्लीनचिट दी थी। देशभर में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय बेंच में भी जस्टिस एसए बोबडे शामिल थे। वहीं अयोध्या मामले की 40 दिन की मैराथन सुनवाई कर ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाली पांच जजों की संविधान पीठ में भी जस्टिस एसए बोबडे शामिल रहे हैं। सुनवाई के दौरान हिंदू व मुस्लिम पक्षकारों से सबसे अधिक सवाल जवाब इन्होंने ही किए थे।

जस्टिस बोबडे के परदादा वकील थे

नागपुर के वरिष्ठ वकील अरुण पाटिल ने लंबे समय तक जस्टिस बोबडे के साथ काम किया है। वे कहते हैं कि किसी एक परिवार का विधि क्षेत्र में कितना बड़ा योगदान रह सकता है, इसका उदाहरण नागपुर का बोबडे परिवार है। जस्टिस बोबडे के परदादा रामचंद्र पंत बोबडे 1880 से 1900 के बीच चंद्रपुर (तत्कालीन चांदा) में ख्यात वकील थे। बाद में उनका परिवार नागपुर आ गया। बाद की पीढ़ी में एमआर उपाख्य भैयासाहब बोबडे और श्रीनिवास बोबडे भी प्रसिद्ध वकील हुए। 1934 में एमआर बोबडे मध्य प्रांत के महाधिवक्ता भी हुए। इसके बाद वे तत्कालीन मध्य भारत प्रांत के काउंसिल के पहले अध्यक्ष भी थे।

शरद बोबडे के पिता अरविंद उर्फ भाऊसाहब बोबडे भी प्रसिद्ध वकील थे। उन्होंने भी महाराष्ट्र के महाधिवक्ता का पद संभाला। उनके चाचा विनोद बोबडे सुप्रीम कोर्ट में प्रसिद्ध वकील थे। इन्हीं सब लोगों की परंपरा को जस्टिस शरद बोबडे आगे बढ़ा रहे हैं। जस्टिस शरद अरविंद बोबडे का जन्म 24 अप्रैल 1956 में नागपुर में हुआ था। इन्होंने 1978 में नागपुर विश्वविद्यालय से बीए और एलएलबी की डिग्री हासिल की। इसके बाद इन्होंने 13 सितंबर 1978 से वकील के रूप में नामांकन कराकर बॉम्बे हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की। 1998 में इन्हें वरिष्ठ वकील की उपाधि दी गई। ये 29 मार्च 2000 को बाॅम्बे हाईकोर्ट के जज बने। इसी क्रम में 16 अक्टूबर 2012 को जस्टिस बोबडे मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने और 12 अप्रैल 2013 को वे सुप्रीम कोर्ट के जज बने।

न्याय के सर्वोच्च पद पर आसीन होने वाले नए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और वर्तमान चीफ जस्टिस के बारे में दैनिक भास्कर हमेशा विशेष स्टोरी देता रहा है। यह 8वां मौका है।

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