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दिल्ली – अवैध कॉलोनियों में रहने वालों को संपत्ति का मालिकाना हक मिलेगा, 79 गांवों के शहरीकरण को मंजूरी

  • उप-राज्यपाल ने दिल्ली भूमि सुधार कानून की धारा यू/एस-81 को हटाने के निर्देश दिए
  • इस निर्णय के बाद लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का फायदा मिल सकेगा

राजधानी की अनाधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक देने के लिए, उपराज्यपाल (एलजी) अनिल बैजल ने बुधवार को 79 गांवों के शहरीकरण को मंजूरी दे दी। अब गांवों की जमीन पर बसीं अनाधिकृत कॉलोनियों को वैध किया जा सकेगा। इससे लोगों की संपत्ति को कानूनी मान्यता तो मिलेगी ही, साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाय) के तहत भी घर बनाए जा सकेंगे।

दिल्ली आवास अधिकार योजना के तहत गांवों के शहरीकरण को मंजूरी दी गई है। एलजी ने इसके लिए दिल्ली भूमि सुधार कानून (लैंड रिफॉर्म एक्ट) की धारा यू/एस-81 को हटाने के निर्देश दिए। इससे पहले केंद्र सरकार ने 23 अक्टूबर को अनाधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को उनके घर का मालिकाना हक देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। कैबिनेट के इस फैसले से 40 लाख लोगों को फायदा होने की बात कही गई थी।

केंद्र ने अक्टूबर में 1,797 कॉलोनियों को वैध किया
कैबिनेट के फैसले से दिल्ली के 175 वर्ग किमी क्षेत्र में बसी 1,797 अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को फायदा होगा। इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को अब संपत्ति का मालिकाना हक मिल सकेगा, जिससे संपत्ति की खरीद-फरोख्त को कानूनी जामा पहनाया जा सकेगा। सरकार के मुताबिक, इन कॉलोनियों में बड़ी संख्या में निम्न आय वर्ग के लोग रहते हैं। अब उन्हें नागरिक सुविधाओं के लिए भी परेशान नहीं होना पड़ेगा, क्योंकि सरकार की तरफ से इन कॉलोनियों में विकास कार्य किए जा सकेंगे।

नियमितीकरण के लिए शुल्क जमा करना होगा

केंद्र की योजना के मुताबिक, नियमितीकरण के लिए लोगों को प्लॉट के क्षेत्रफल और फ्लोर एरिया के आधार पर शुल्क जमा करना होगा। यह शुल्क, नजदीकी रहवासी इलाके के अधिकतम सर्किल रेट के आधार पर तय किया जाएगा। सरकारी जमीन पर बसी कॉलोनियों में 100 स्क्वेयर मीटर तक के प्लॉट के लिए सर्किल रेट का 0.5%, 100 से 250 स्क्वेयर मीटर के लिए 1% और 250 स्क्वेयर मीटर से अधिक के लिए 2.5% शुल्क देना होगा। निजी जमीन पर बसी कॉलोनियों के लिए यह रकम और भी कम होगी।

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