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पिता के साथ हुए हादसे के बाद छूट गई थी पढ़ाई, अब पढ़ लिखकर कुछ बनना चाहती है ज्योति

लॉकडाउन ने लाखों प्रवासियों को जीवन भर न भूलने वाला दर्द दिया। कोई सैकड़ों किलोमीटर भूखे-प्यासे पैदल चलकर अपने घर लौटा तो किसी ने रास्ते में ही जान गंवा दी। इस बीच इंसान के हौसले और चट्टान जैसे मजबूत इरादों की कहानी भी सामने आई। ऐसी ही एक कहानी है बिहार के दरभंगा जिले के सिंहवाड़ा प्रखंड के सिरहूल्ली गांव में रहने वाली ज्योति कुमारी की। ज्योति अपने बीमार पिता को साइकिल पर बैठाकर 10 मई को दिल्ली से चली और 16 मई को दरभंगा पहुंची। उसने सात दिन में 1200 किलोमीटर की दूरी तय की।

13 साल की ज्योति के साहस की सराहना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी और सलाहकार इवांका ट्रम्प ने की है। ज्योति ने इसके लिए इवांका को धन्यवाद कहा है। उसने कहा कि मैं पहले इवांका दीदी को नहीं जानती थी। अब जान गई हूं। उन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। वह बहुत बड़ी शख्सियत हैं। उन्होंने मेरे जैसी छोटी बच्ची की तारीफ की। यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है। मैं बहुत खुश हूं। 

पिता के हादसे के चलते छूट गई थी पढ़ाई

ज्योति के परिवार में छह लोग हैं। दो भाई, दो बहन और माता-पिता। ज्योति के पिता मोहन पासवान अकेले दिल्ली में रहकर रिक्शा चलाते थे। ज्योति की मां गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के लिए खाना बनाती हैं। उन्हें दो हजार रुपए प्रतिमाह मिलता है। ज्योति ने कहा कि माता-पिता की कमाई से किसी तरह घर चल रहा था। मैं गांव के स्कूल में पढ़ने जाती थी, लेकिन पिता के साथ हुए हादसे में सबकुछ बिखर गया। एक ट्रक ने मेरे पिता के रिक्शा को धक्का मार दिया था। पिता का घुटना टूट गया। मैं अपनी पढ़ाई छोड़ दिल्ली गई ताकि उनका ख्याल रख सकूं। उनके इलाज में बचाकर रखे एक-एक रुपए खर्च हो गए। मां ने कई लोगों के कर्ज भी लिया।

500 रुपए में खरीदी साइकिल
ज्योति ने कहा कि मैंने साइकिल चलाना सीख रखा था। दिल्ली में मेरे पास साइकिल नहीं थी। लॉकडाउन के चलते जब भूखे मरने की नौबत आई तब जन-धन खाते से 500 रुपए निकाला। इस पैसे से एक पुरानी साइकिल खरीदी और उसी पर पापा को बैठाकर ले आई। मैंने सिर्फ बेटी होने का फर्ज निभाया। मुझे जब भी ऐसा मौका मिलेगा अपने माता-पिता की सेवा करती रहूंगी।

पढ़-लिखकर कुछ बनना चाहती हूं

ज्योति ने कहा कि मैं पढ़-लिखकर कुछ बनना चाहती हूं ताकि समाज के लिए कुछ अच्छा कर सकूं। अभी तो लॉकडाउन है। लॉकडाउन खत्म होता है तो स्कूल में नाम लिखवाउंगी। मैं दिल्ली नहीं जाऊंगी। यहीं आगे पढ़ना है। साइकिलिंग फेडरेशन ने ट्रायल के लिए बुलाया है। मैं एक माह बाद ट्रायल देने दिल्ली जाऊंगी। अभी होम क्वारैंटाइन में हूं।

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