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पुलिस आरक्षक भर्ती घोटाला: 30 दोषियों को 7-7 साल और दलाल त्यागी को 10 साल की सजा

  • व्यापमं घोटाले से जुड़े 14वें केस में फैसला, पहली बार सभी आरोपियों को सजा हुई
  • दोषियों में 12 फर्जी परीक्षार्थी और 7 दलाल शामिल, सभी को सेंट्रल जेल भेजा गया
  • व्यापमं के 7 केस में जांच जारी, 143 में चार्जशीट दाखिल, करीब 1000 परीक्षार्थी आरोपी .

पमं की पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा 2013 के मामले में सोमवार को सीबीआई की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाया। अदालत ने 30 दोषियों को को 7-7 साल, जबकि दलाल प्रदीप कुमार त्यागी को 10 साल की सजा सुनाई। अदालत ने दलाल त्यागी को मुख्य सूत्रधार माना। पिछले सप्ताह (गुरुवार को) सीबीआई की विशेष अदालत ने मामले में सभी 31 आरोपियों को दोषी करार दिया था और आज के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया था।

मामले में जिन्हें सजा हुई, उसमें 12 परीक्षार्थी, 12 फर्जी परीक्षार्थी (जिन्होंने मुख्य परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी) और 7 दलाल शामिल हैं। विशेष जज जस्टिस एसबी साहू ने सजा सुनाने के बाद, सभी आरोपियों को भोपाल सेंट्रल जेल भेज दिया। व्यापमं से जुड़े 150 मामलों में से 14वें केस में सोमवार को फैसला आया, लेकिन पहली बार कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी माना। 

अदालत ने इन्हें सुनाई 7-7 साल की सजा अदालत ने राहुल पांडे, आशीष कुमार पांडे, कुलविजय, अभिषेक कटियार, सुयश सक्सेना, प्रभाकर शर्मा, नीरज उर्फ टिंकू, अनिल यादव, अजय सांकेरवार, धरमेश साहू, फूलकुंवर, देवेंद्र साहू, अजीत चौधरी, भूपेंद्र सिंह तोमर, संतोष शर्मा, चंद्रपाल कश्यप, पंजाब साहू, रविशंकर, नावीस जाटव, मुकेश साहू, अरुण गुर्जर, उदयभान साहू, दानिश धाकड़, अंतनदर साहू, पृथ्वेंद्र साहू तोमर, सुदीप शर्मा, अजय प्रताप साहू, कल्यानी साहू सिकरवार, गुलवीर सिंह जाट और राजवीर सिंह उर्फ बंटी को 7-7 साल की सजा सुनाई।

सजा का आधार: 450 दस्तावेज, 90 गवाहों के बयानसीबीआई के विशेष लोक अभियोजक सतीश दिनकर ने बताया कि व्यापमं की यह परीक्षा 15 सितंबर 2013 को हुई थी। गड़बड़ी की शिकायत के बाद भोपाल और दतिया के सेंटरों पर कार्रवाई के दौरान 31 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामले की जांच एसटीएफ से सीबीआई को सौंपी गई थी। अदालत में 450 से ज्यादा दस्तावेज और 90 गवाहों के बयान लिए गए।

इस तरह पकड़े गए परीक्षा में फर्जीवाड़े के आरोपीसतीश दिनकर ने बताया कि दोषी परीक्षार्थियों ने फार्म भरते समय, अपनी जगह किसी सॉल्वर से परीक्षा दिलाने का प्लान बनाया था। उन्होंने परीक्षा फार्म में अपने धुंधले फोटो लगाए थे, ताकि पर्यवेक्षक सॉल्वर को पहचान न सकें। जब पर्यवेक्षकों ने परीक्षार्थी के चेहरे से फोटो का मिलान किया, तो गड़बड़ी का खुलासा हुआ। इस मामले में दतिया से 6 और भोपाल से 6 परीक्षार्थी गिरफ्तार हुए, वहीं भोपाल से असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दे रहे 12 लोगों की गिरफ्तारी हुई। पूछताछ के बाद, पुलिस ने 7 दलालों को गिरफ्तार किया था। ज्यादातर आरोपी भिंड, मुरैना, दतिया, ग्वालियर, भोपाल और उत्तरप्रदेश के थे।

घोटाले में 170 एफआईआर, 16 मामलों में खात्मासीबीआई ने व्यापमं घोटाले में 170 एफआईआर दर्ज की थीं। इनमें से 143 मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, 7 मामलों की जांच जारी है। संदिग्ध मौतों के 16 मामलों सहित 20 मामलों में खात्मा लगाया जा चुका है। इससे जुड़े केसों में 2500 से ज्यादा लोग आरोपी हैं, जिनमें से करीब 1000 परीक्षार्थी हैं। जुलाई 2015 से सीबीआई इस घोटाले की जांच कर रही है।

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