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पढ़े-लिखे और ज्यादा सैलरी वालों में बढ़ रहे तलाक के केस, 70 फीसदी मामले लव मैरिज के

  • तलाक का कारण- नहीं पसंद उन्हें कोई ऑर्डर दे.
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस बेंग्लुरु के सर्वे में हुआ खुलासा.

पढ़े-लिखे लोगों में तलाक के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं। इस लाइन में वे भी हैं, जिनके पास ऊंची डिग्रियां हैं और मोटी सैलरी है। ये रिश्तों को लेकर सेंसेटिव नहीं हैं। इनमें से 70 फीसदी मामले लव मैरिज वाले कपल्स के हैं।

यह बात एक सर्वे में निकलकर सामने आई है। बेंग्लुरु में तलाक के 400 फीसदी तक मामले बढ़ने के बाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस (निमहांस) बैंगलोर ने एक सर्वे किया था। रिसर्च को उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी स्थित यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज (यूआईपीएस) में चल रहे चौथे इब्रो स्कूल के दौरान साझा किया।

डॉ. राव ने बताया कि पढ़े-लिखे लोग अपने सोशल रिश्तों को संभालने में कामयाब नहीं हैं। तलाक के पीछे जो सबसे बड़ी वजह पाई गई, वह पैसों को लेकर अनबन थी। जो ज्यादा कमा रहा है, उसकी दूसरे व्यक्ति के लिए ये भावना है कि ‘ये मुझे कैसे आदेश दे रहा है, तुम्हें जरूरत है तो एक नौकर और रख लो’। कुछ ऐसी ही वजहों से तलाक बढ़ रहे हैं।

दूसरी समस्या ये है कि लव मैरिज वाले मामलों में पति-पत्नी अपने परिवार से भी बात नहीं कर पाते, क्योंकि ये शादी उनका अपना फैसला होता है। जब भी कभी पति-पत्नी में लड़ाई होती है, तब उन्हें समझाने वाला, समझौता करवाने वाला कोई नहीं होता।

सिर्फ दो फीसदी न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर जीन के कारण…
डॉ. राव ने बताया कि न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के मामले में पेरेंट्स को दोष न दें, क्योंकि रिसर्च बताती है कि दो से लेकर पांच फीसदी तक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर जीन के कारण हैं, बाकियों की वजह स्ट्रेस है।

आइसोलेशन, अर्बनाइजेशन, रैट रेस और न्यूक्लियर फैमिली की वजह से लोगों के लिए स्ट्रेस से कोप-अप करना मुश्किल हो रहा है। छोटी उम्र में होने वाले स्ट्रोक, हर तरह के हारमोनल डिसऑर्डर, दिल के दौरे और एपीलेप्सी आदि का कारण स्ट्रेस हे।

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