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Rajiv Gandhi Case : राजीव गांधी हत्‍या मामले में सीबीआइ को तीन देशों के जवाब का इंतजार

 Rajiv Gandhi Assassination Case पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्‍या के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सीबीआइ ने कोर्ट को बताया कि उसे इस मामले में अभी तक तीन देशों के जवाब का इंतजार है। सीबीआइ ने 21 मई 1991 को श्रीलंका के आतंकी समूह लिट्टे के आत्‍मघाती दस्‍ते द्वारा राजीव गांधी की हत्‍या के संबंध में बड़े षड़यंत्र को लेकर तीन देशों से जानकारियां मांगी है। हालांकि, इसको लेकर इंतजार काफी लंबा हो गया है।

24 देशों को 25 अनुरोध पत्र लिखे गए

सीबीआइ ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘राजीव गांधी की हत्‍या के मामले में 24 देशों को 25 अनुरोध पत्र लिखे गए हैं। इनमें से तीन देशों की प्रतिक्रिया अभी नहीं आई है, जिनकी प्रतीक्षा की जा रही है।’ इस दौरान जैन जांच आयोग द्वारा उठाए गए ज्‍यादातर बिंदुओं की जांच मल्‍टी-डिसिप्लिनरी मॉनिटरिंग एजेंसी ने पूरी कर ली है और उसे अदालत के समझा पेश कर दिया है। यहां सीबीआइ ने यह भी साफ किया कि इनमें से कुछ मुद्दों के परिणाम विदेशों में भेजे गए अनुरोध पत्रों पर आधारित हैं।

मल्‍टी-डिसिप्लिनरी मॉनिटरिंग एजेंसी की रिपोर्ट कोर्ट में सौंपी

हालांकि, सीबीआइ ने सुनवाई के दौरान इस बात का खुलासा नहीं किया कि किन तीन देशों की प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा की जा रही है। उच्‍चतम न्‍यायालय ने सीबीआइ से एजेंसी की मल्‍टी डिसिप्लिनरी मॉनिटरिंग एजेंसी द्वारा की गई जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। इस रिपोर्ट को सीबीआइ ने सौंप दिया है, हालांकि, इस रिपोर्ट में क्‍या है इसकी जानकारी भी साझा नहीं की गई है।

उल्‍लेखनीय है कि न्‍यायमूर्ति एल नागेश्‍वर राव और न्‍यायमूर्ति दीपक गुप्‍ता की पीठ याचिकाकर्ता एजी पेरारीवालन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में कहा गया है कि जब तक एमडीएमए की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उसे इस मामले में मिली उम्रकैद की सजा निलंबित की जाए।

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Written by Bhanu Pratap

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