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शरद पवार के बयान के बाद सरगर्मी तेज, क्या कहता है दल-बदल कानून

  • बीजेपी ने दावा किया है कि वे बहुमत का आंकड़ा साबित कर देंगे
  • शरद पवार ने कहा कि बीजेपी बहुमत साबित नहीं कर पाएगी

महाराष्ट्र के सियासी घटनाक्रम में अचानक हुए बदलाव के बाद बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस ने दोबारा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है और उनके साथ एनसीपी नेता अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली है. इससे पहले कांग्रेस और एनसीपी शिवसेना के साथ सरकार बनाने जा रही थी. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या बीजेपी अपना बहुमत साबित कर पाएगी.

दरअसल, बीजेपी ने दावा किया है कि वे बहुमत का आंकड़ा साबित कर देंगे. बीजेपी विधायक गिरीश महाजन ने कहा कि हम 170 से अधिक विधायकों के समर्थन के साथ अपना बहुमत साबित करेंगे, लेकिन उधर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि वे बहुमत साबित नहीं कर पाएंगे.

पवार बोले- हमारे पास नंबर है, सरकार हम ही बनाएंगे

शिवसेना और शरद पवार ने एक साझा प्रेस कांफ्रेंस की. इसमें शरद पवार ने कहा कि अजित के साथ गए विधायकों ने हमसे संपर्क किया था. अजित के पास जो चिट्ठी थी उसमें सभी 54 विधायक हस्ताक्षर थे. शरद पवार ने कहा कि अजित पवार के साथ 11 विधायक गए थे. इसमें दो विधायक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए हैं. खैर हमारे पास नंबर है और सरकार तो हम ही बनाएंगे.

शरद पवार ने कहा कि आज शाम की बैठक में आगे का फैसला तय होगा. हम जो निर्णय लेंगे, वो शिवसेना की सहमति के बिना नहीं लेंगे. मुझे कोई चिंता नहीं है पहले भी मेरे साथ ऐसा हो चुका है. पवार ने यह भी कहा कि जितने विधायक बीजेपी के साथ गए हैं उन्हें दल-बदल कानून के बारे में पता नहीं है. पवार के इस बयान के बाद महाराष्ट्र में सरगर्मी तेज हो गई है और दल-बदल कानून को लेकर चर्चा चल रही है.

क्या कहता है दल बदल कानून (एंटी डिफेक्शन लॉ)

अनुसूची के दूसरे पैराग्राफ में एंटी डिफेक्शन लॉ के तहत अयोग्य करार दिए जाने का आधार स्पष्ट किया गया है-

-यदि कोई विधायक स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता त्याग दे

-अगर वह पार्टी द्वारा जारी किए गए निर्देश के खिलाफ जाकर वोट करे या फिर वोटिंग से दूर रहे.

-निर्दलीय उम्मीदवार अयोग्य करार दे दिए जाएंगे अगर वह किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल हो जाएं

-एक पार्टी का विलय दूसरी पार्टी में हो सकता है लेकिन इसके लिए कम से कम पार्टी के दो-तिहाई विधायकों का वोट जरूरी है.

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान में ‘स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ने’ को भी स्पष्ट किया है. पार्टी के जारी निर्देश के खिलाफ वोटिंग करने या वोटिंग से दूर रहने को लेकर भी कोर्ट ने व्याख्या दी है. ‘रवि नायक बनाम भारत संघ’ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया था कि स्वेच्छापूर्वक सदस्यता छोड़ना इस्तीफा नहीं है, बल्कि इसकी व्याख्या कहीं ज्यादा विस्तृत है. कोई सदस्य किसी राजनीतिक पार्टी से स्वेच्छा से अपनी सदस्यता छोड़ सकता है भले ही उसने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा ना दिया हो.

एक दूसरे फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर किसी पार्टी का कोई विधायक अपनी राजनीतिक पार्टी से बाहर किसी और नेता को सरकार बनाने के लिए समर्थन का पत्र राज्यपाल को सौंप देता है तो यह मान लिया जाएगा कि उस सदस्य ने पार्टी की अपनी सदस्यता स्वेच्छापूर्वक त्याग दी है.

महाराष्ट्र में बहुमत का आंकड़ा 145

बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा में 288 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 145 का है. विधानसभा चुनाव के नतीजों में  बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली हैं.

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