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सभी दलों के सांसदों ने फूड सब्सिडी खत्म करने का फैसला किया, हर साल करीब 17 करोड़ रुपए की बचत होगी

  • लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कैंटीन के खाने पर मिलने वाली सब्सिडी समाप्त करने का सुझाव दिया था- सूत्र
  • अब सभी सांसदों को सामान्य रेट पर कैंटीन में खाना मिलेगा, 2016 में खाने की कीमतें बढ़ाई गई थी

संसद की कैंटीन में फूड सब्सिडी खत्म कर दी जाएगी। सूत्रों के अनुसार, सभी दलों के सांसदों ने सब्सिडी को पूरी तरह खत्म करने पर सहमति जताई है। लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कैंटीन के खाने पर मिलने वाली सब्सिडी समाप्त करने का सुझाव दिया था। सब्सिडी वापस लेने से हर साल लगभग 17 करोड़ रुपए की बचत होगी।

सूत्रों के मुताबिक, अब संसद के सदस्यों को सामान्य रेट पर खाना मिलेगा। संसद कैंटीन में खाने पर भारी-भरकम सब्सिडी को लेकर दिसंबर 2015 में मीडिया में आई रिपोर्टों के बाद एक जनवरी 2016 को भी कैंटीन के खाने की कीमतें बढाई गई थी। सांसदों के साथ-साथ वहां कार्यरत स्टाफ, सुरक्षाकर्मी, पत्रकार और संसद की कार्यवाही देखने के लिए आने वाले लोग अमूमन संसद कैंटीन में ही खाना खाते हैं। संसद की कैंटीन में खाने पर मिलने वाली सब्सिडी को लेकर समय-समय पर विरोध की आवाज उठती रही है।

2015 में बीजद सांसद ने सब्सिडी खत्म करने की मांग उठाई थी

2015 में रिपोर्ट्स में सामने आया था कि कैंटीन में खाने की लागत पर 80% तक सब्सिडी दी जाती है। उस समय बीजद के सांसद बिजयंत जय पांडा ने स्पीकर को चिट्‌ठी लिखकर सब्सिडी खत्म किए जाने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि जब सरकार आर्थिक रूप से मजबूत लोगों से एलपीजी सब्सिडी वापस करने के लिए कह रही है तो सांसदों से भी कैंटीन में सब्सिडी की सुविधा वापस ले लेनी चाहिए।

संसद में मिलने वाली फूड सब्सिडी

वित्तीय वर्षसब्सिडी
2012-1312.52 करोड़ रु.
2013-1414.09 करोड़ रु.
2014-1515.85 करोड़ रु.
2015-1615.97 करोड़ रु.
2016-1615.40 करोड़ रु.

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