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गुड़गांव-मानेसर और सिंधिया-पायलट कनेक्शन, कहीं इसने तो नहीं बढ़ा दी अशोक गहलोत की धड़कन!

राजस्थान में सियासी सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। सत्ताधारी कांग्रेस के 24 विधायक मानेसर के एक होटल में रुके हुए हैं। सीएम गहलोत प्रतिद्वंद्वी बीजेपी पर सरकार गिराने की कोशिश का आरोप लगा रहे हैं तो बीजेपी इसे कांग्रेस का अंदरूनी खींचतान बता रही है।

सीएम और युवा डेप्युटी सीएम के बीच खींचतान की चर्चाएं, युवा नेता का दिल्ली में डेरा डालना, पार्टी के 24 विधायकों का दिल्ली से सटे प्रतिद्वंद्वी पार्टी शासित दूसरे राज्य में होटल में रुकना और कथित तौर पर पार्टी नेतृत्व के संपर्क में नहीं रहना, मुख्यमंत्री का विरोधी दल पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाना…कोरोना संकट के बीच कांग्रेस शासित राजस्थान (Rajasthan Political Crisis) में अचानक सियासी हलचल बहुत तेज हो चुकी है।
कमलनाथ जैसे हश्र का डर!
सब कुछ करीब-करीब वैसा ही जैसा 4 महीने पहले तब कांग्रेस शासित मध्य प्रदेश में हुआ था और आखिरकार कमलनाथ सरकार गिर गई थी। ऐसे में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत की धड़कनों का बढ़ना लाजिमी है कि कहीं उनका भी हश्र कमलनाथ जैसा न हो।

तो क्या राजस्थान में दोहराई जा रही एमपी की कहानी?
4 महीने पहले मध्य प्रदेश में जो कुछ हुआ और आज राजस्थान में जो कुछ हो रहा है, उनमें बहुत समानताएं हैं। तब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस के 22 विधायकों का इस्तीफा कराकर कमलनाथ सरकार को गिरा दिया था। विधायकों को पहले गुड़गांव और बाद में बेंगलुरू के होटल में ठहराया गया था। कमलनाथ के सामने तब युवा ज्योतिरादित्य सिंधिया थे तो अब गहलोत के सामने युवा डेप्युटी सीएम सचिन पायलट हैं। पायलट 3 दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। दूसरी तरफ राजस्थान कांग्रेस के 24 विधायक शनिवार रात से ही गुड़गांव के ही मानेसर में एक बड़े होटल में रुके हुए हैं। कई विधायकों के मोबाइल फोन स्विच्ड ऑफ हैं।

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