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महिला किसान ने आठ से दस इंच की दूरी पर हाथ से बोया गेहूं का एक-एक बीज, 44 क्विंटल प्रति एकड़ का रिकॉर्ड उत्पादन

  • कृषि कर्मण पुरस्कार होशंगाबाद का देश में डंका, दो महिला किसानों को आज प्रधानमंत्री कर्नाटक में देंगे सम्मान
  • ट्रैक्टर-बैलों की बजाय उन्होंने हाथ गेंहू बोने का फैसला किया, दोनों किसान परिवार समेत तुमकारु पहुंचे

होशंगाबाद. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 जनवरी को तुमकारु (कर्नाटक) में होशंगाबाद जिले की महिला किसान कंचन वर्मा और शिवलता मेहताे को गेहूं और चना में अच्छी उत्पादकता के लिए सम्मानित करेंगे। दोनों किसान परिवार के साथ तुमकारु पहुंच गए हैं। यह पुरस्कार क्रमश: 2016-17 और 2017-18 के लिए दिए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री महिला किसानों को प्रगतिशील किसान कृषि कर्मण अवार्ड एवं 2 लाख रु. देकर सम्मान करेंगे। साथ ही, प्रदेश सरकार को कृषि कर्मण अवार्ड दिया जाएगा। मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2 करोड़ रुपए की राशि भी दी जाएगी। 

बलोर की पत्तियां गिरती थीं खेत में ही और मिल जाती थी : किसान कंचन और उनके पति शरद ने बताया जिस खेत में हमने गेहूं लगाया था, वहां पहले कभी बलोर की फसल लेते थे। सालों साल पत्तियां वहीं खेत में गिरकर मिट्‌टी में मिलती रहती थी, इससे भी खेत की उर्वरता बहुत अच्छी रही। फाउंडेशन का 3000 रुपए प्रति क्विंटल वाला 322 किस्म का गेहूं बीज डाला था।

तीसरा फायदा यह है कि दानों को ऑक्सीजन सहित फैलाव के लिए पर्याप्त जगह मिलने से वे खुलकर पनपते गए। यह उत्पादकता बढ़ाने का सबसे बड़ा फैक्टर है और इसी कारण से दाने भी बड़े हुए। वैसे छोटे किसान यदि इसी तरह बोवनी करते हैं तो अच्छा उत्पादन ले सकते हैं क्योंकि होशंगाबाद की मिट्टी में यह क्षमता है।

कंचन : फसल अवशेषों को जलाते नहीं हैं, उन्हें खेत में सड़ाकर खाद बना लेते हैं
सोमलवाड़ा की किसान कंचन वर्मा का खेत नानपुर खुर्द में है। इन्होंने प्रति एकड़ 44 क्विंटल गेहूं पैदा किया। जिले की औसत उत्पादकता 35-36 क्विंटल है। उपसंचालक कृषि जितेंद्र सिंह ने बताया उनके खेत में गेहूं फसल खड़ी थी और वहां मक्का के भुट्टा सड़े हुए पड़े मिले। यानी वे फसलों के अवशेष को फेंकने के बजाय वहीं छोड़ देते हैं जो सड़ने के बाद खाद का काम करते हैं। खेत में बैलों या ट्रैक्टर के बजाय एक-एक दाना हाथ से रोप और 8 से 10 इंच की पर्याप्त दूरी भी रखी। इससे बीज भी कम लगा। वैज्ञानिक कहते हैं कि प्रति एकड़ 40 किग्रा से ज्यादा बीज नहीं डालना चाहिए। मैंने देखा है कि जिले में कई किसान प्रति एकड़ एक-एक क्विंटल बीज डाल देते हैं जो कि सही नहीं है।


शिवलता : पुरस्कार का फोन आया तब खरपतवार उखाड़ रही थीं
पथरौटा की शिवलता मेहता पौने दो हेक्टेयर की किसान हैं। इन्होंने 2017-18 में प्रति एकड़ 19 क्विंटल चना पैदा किया है। आरवीजी 202 किस्म का बीज लगाया था। शिवलता ने बताया गोबर की ही खाद डालते हैं, नरवाई जलाते नहीं। परिजन खुद पूरी खेती का काम करते है। शिवलता कहती हैं कि जिस दिन अवार्ड की सूची मिली तब खेत में कचरा उखाड़ रही थीं। आदिवासियों से गोबर लेते हैं।

इन 4 तरीकों से हुआ रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन, सामान्य से 10 क्विं. ज्यादा

बोवनी : धान के पौधे की तर्ज पर पर्याप्त दूरी पर गेहूं दाना बोया, एक बीज के 40 से 50 तक कूचे बनने से बड़ा उत्पादन
बीज : प्रति एकड़ 40 किग्रा बीज (किस्म-322) ही डाला, वैज्ञानिक भी यही सलाह देते हैं कि ज्यादा बीज ठीक नहीं।
नरवाई : कभी नहीं जलाई, फसल अवशेषों को खेत में सड़ाते हैं, यह जैविक खाद का काम करती है
खेत : मृदा संरक्षण कार्ड में मिलने वाली सलाह पर ही खाद डालते हैं, रसायन का उपयोग कम। जैविक खाद का उपयोग।

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