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अमरनाथ यात्रा इस साल नहीं होगी, यह पहला मौका जब शुरू होने से पहले ही यात्रा रद्द कर दी गई है

कोरोनावायरस के चलते अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने इस साल 23 जून से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा को रद्द कर दिया है। यह पहला मौका है, जब शुरू होने से पहले ही अमरनाथ यात्रा कैंसिल की गई है। जम्मू में राजभवन में बुधवार को हुई एक अहम बैठक में लेफ्टिनेंट गवर्नर गिरीशचंद्र मुर्मू ने यह फैसला लिया है। 2000 में अमरनाथ श्राइन बोर्ड बनाया गया था। जम्मू कश्मीर के राज्यपाल/उपराज्यपाल इसके चेयरमैन होते हैं। इससे पहले पिछले साल अगस्त में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाने के ठीक 3 दिन पहले सुरक्षा का हवाला देते हुए अमरनाथ यात्रा रोक दी थी। यात्रा रोके जाने तक साढ़े तीन लाख लोग पवित्र गुफा में दर्शन कर चुके थे।

जहां से यात्रा गुजरती है, वहां 10 जिले कोरोना प्रभावित और 77 रेड जोन

जम्मू कश्मीर में 407 पॉजिटिव मरीज हैं, जिनमें से 351 सिर्फ कश्मीर से हैं। जहां से अमरनाथ यात्रा गुजरती है, उस कश्मीर घाटी के 10 जिले कोरोना प्रभावित हैं। चार जिले श्रीनगर, बारामुला, बांडीपोरा और कुपवाड़ा को हॉट स्पॉट घोषित किया गया है। श्राइन बोर्ड के चेयरमैन और उपराज्यपाल मुर्मू ने भी यही बात कही है। उनके मुताबिक जिस रूट से यात्रा को गुजरना है, वहां 77 रेड जोन हैं। यात्रा के लिए लंगर और कैम्प तैयार करना होते हैं। साथ ही मेडिकल फैसिलिटी जुटाना होती है, जो इस महामारी के बीच संभव नहीं है। उनके मुताबिक 3 मई के बाद क्या होगा, यह भी अभी तय नहीं है और यात्रियों की सुरक्षा हमारे लिए अहम है। हालांकि, बोर्ड ने फैसला लिया है कि प्रथम पूजा और सम्पन्न पूजा पारंपरिक तरीके से होगी। इस संभावना पर भी विचार किया जाएगा कि बाबा बर्फानी की पूजा और दर्शन का टेलिकॉस्ट ऑनलाइन किया जाए।

यात्रा रूट पर कई फीट बर्फ, बेस कैम्प में क्वारैंटाइन सेंटर
तय कार्यक्रम के मुताबिक, इस यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन 1 अप्रैल को शुरू होने थे। यात्रा शुरू होने के महीने पहले रूट से बर्फ हटाने का काम हो जाता है, जबकि इस बार वहां अभी भी कई फीट बर्फ मौजूद है। जम्मू में जिस यात्री निवास को अमरनाथ यात्रियों का बेस कैम्प बनाया जाता था, वह इन दिनों क्वारैंटाइन सेंटर बना हुआ है। जम्मू कश्मीर की सीमा को सील किया हुआ है और जरूरी सामान के अलावा किसी भी गाड़ी के आनेजाने की मनाही है। टूरिज्म इंडस्ट्री से जुड़े स्थानीय लोगों को इस यात्रा का हर साल इंतजार होता है। इस पर वहां रहने वाले पिट्‌ठू और पोनी वालों का सालभर की आमदनी निर्भर होती है। 

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