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तोड़फोड़ के आरोप में छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी समेत 19 पर केस

  • रविवार को कुछ नकाबपोशों ने जेएयू कैपस में घुसकर छात्रों-शिक्षकों को लाठी और रॉड से मारा.
  • लेफ्ट से जुड़े छात्रों ने पुलिस पर आरोप लगाया- सूचना के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई.
  • गेटवे ऑफ इंडिया के पास यातायात में हो रही परेशानी के कारण प्रदर्शनकारियों को आजाद मैदान भेजा गया.

जेएनयू कैंपस में रविवार को हुई हिंसा के आरोप में छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष समेत 19 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। उधर, हिंसा के तीन दिन बीत जाने के बाद भी दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया है। इस बीच मुंबई स्थित गेटवे ऑफ इंडिया पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को आजाद मैदान शिफ्ट कर दिया गया है। यहां एक युवती फ्री कश्मीर का पोस्टर लिए भी नजर आई। रविवार को कुछ नकाबपोशों ने कैंपस में घुसकर छात्रों और शिक्षकों के साथ मारपीट की थी और हॉस्टल में तोड़फोड़ की थी।

यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार शाम इंडिया गेट पर मशाल रैली निकाली। तमिलनाडु में भी छात्रों ने कैंडल मार्च निकाला। कोलकाता में लेफ्ट और भाजपा समर्थक इसी मामले पर आमने-सामने आ गए। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। सुरक्षा के मद्देनजर जेएनयू में 700 पुलिसकर्मी तैनात किए गए, क्योंकि उत्तरी गेट पर छात्र एकत्रित होकर विरोध जता रहे थे।

फडणवीस बोले- प्रदर्शन आखिर क्यों?
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ट्वीट किया, ‘‘आखिर प्रदर्शन हो क्यों रहा है? फ्री कश्मीर जैसे नारों की जरूरत क्या है? मुंबई में हम अलगाववादी तत्वों को बर्दाश्त कैसे कर सकते हैं? फ्री कश्मीर के पोस्टर मुख्यमंत्री कार्यालय से महज 2 किमी दूर लहराए गए। उद्धव जी, क्या आप अपनी नाक के नीचे भारत विरोधी अभियान पर सहमति जताएंगे?’’

प्रदर्शनकारियों ने अमित शाह से इस्तीफे की मांग की

मुंबई में एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि जेएनयू हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों की वजह से गेटवे ऑफ इंडिया के पास सड़क पर जाम लग गया था। पर्यटकों और आम लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही थी। हमने प्रदर्शनकारियों से आजाद मैदान जाने की अपील की थी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। छात्रों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों समेत सैकड़ों लोग रविवार आधी रात से ही गेटवे ऑफ इंडिया पर जमा होकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की भी मांग की।

आइशी ने इसे सुनियोजित हमला कहा; एबीवीपी का आरोप- इसमें लेफ्ट शामिल

आइशी ने सोमवार को कहा कि यह एक सुनियोजित हमला है। आरएसएस से जुड़े कुछ प्रोफेसर हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं। छात्रसंघ के उपाध्यक्ष साकेत मून ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि हमने हमले के दो घंटे पहले उन्हें सूचित किया गया था, लेकिन फिर भी कोई मदद नहीं मिली। उधर, एबीवीपी ने सोमवार को आरोप लगाया कि हमले में लेफ्ट के लोग भी शामिल हैं। जेएनयू में एबीवीपी के सेक्रेटरी मनीष जांगीड़ ने दावा किया कि हमलावर मास्क पहने हुए थे। उनका नेतृत्व जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष कर रही थी।

एबीवीपी के छात्रों को निशाना बनाया गया

मनीष ने कहा- हमें पता चला कि हमलावर कावेरी हॉस्टल की तरफ आ रहे थे और मैं पेरियार हॉस्टल में अपने दोस्तों के साथ छिपा हुआ था। हॉस्टल के अंदर उन्होंने एबीवीपी से जुड़े छात्रों के कमरों पर हमला किया। उन्होंने कमरों में तोड़फोड़ की और जब मैं हॉस्टल के दूसरे विंग में गया तो उन्होंने मुझे तब तक लाठियों से पीटा जब तक मैं बेहोश नहीं हो गया।

फीस बढ़ोतरी के खिलाफ हिंसा हुई थी

जेएनयू में फीस बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान रविवार रात हिंसा हुई थी। नकाबपोशों ने छात्र-शिक्षकों को डंडे और लोहे की रॉड से बुरी तरह पीटा। वे ढाई घंटे तक कैंपस में कोहराम मचाते रहे। हमले में छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष समेत कई घायल हो गए। आइशी ने एबीवीपी पर हमले का आरोप लगाया और कहा कि नकाबपोश गुंडों ने मुझे बुरी तरह पीटा। करीब 35 लोग जख्मी हो गए। अब तक 23 घायलों को एम्स से छुट्टी मिल चुकी है।

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