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केंद्र सरकार ने रेलवे का 114 साल पुराना प्रशासनिक ढांचा बदलने काे दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने रेलवे का 114 साल पुराना प्रशासनिक ढांचा बदलने काे मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में यह फैसला हुअा। इसके तहत ग्रुप ए की 8 सर्विस का विलय कर भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा (आईआरएमएस) गठित की गई है। इंजीनियरिंग, मेकेनिकल, इलेक्ट्रिकल्स, लेखा, भंडारण, कार्मिक, यातायात, सिग्नल एवं टेलीकॉम सेवाओं के विलय का फैसला मंगलवार से ही लागू हो गया है। रेलवे बाेर्ड में सदस्याें की संख्या भी 8 से घटाकर 5 कर दी गई है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि बोर्ड पहली बार 1905 में गठित हुअा था। रेलवे 114 साल से विभागीय गुटों में बंटी थी। 

 आठों सेवाओं के अधिकारी बोर्ड में पहुंचने के बाद भी अपने विभागों की चिंता करते थे। इस फैसले से रेलवे में विभागीय गुटबाजी खत्म हाेगी अाैर निर्णय प्रक्रिया में तेजी अाएगी। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष की भूमिका अब मुख्य कार्यकारी अधिकारी की होगी। बाेर्ड में आधारभूत ढांचा, ऑपेरशन्स एवं बिजनेस डेवेलपमेंट, रोलिंग स्टॉक और वित्त से जुड़े सदस्य हाेंगे। नए बोर्ड में सदस्यों के तीन पद खत्म किए गए हैं। कुछ स्वतंत्र सदस्य शामिल हाेंगे। यह प्रबंधन, वित्त या तकनीकी दक्षता के साथ दीर्घकालिक अनुभव वाले विशेषज्ञ होंगे। बाकी सभी पद सभी प्रकार की सेवाओं के अधिकारियों के लिए खुल जाएंगे, जिन पर योग्यता एवं क्षमता के आधार पर नियुक्ति होगी। अध्यक्ष मानव संसाधन प्रबंधन के लिए एक महानिदेशक के साथ काम करेगा।


बोर्ड में सचिव स्तर के 10 पद होंगे, जबकि महाप्रबंधक स्तर के 27 पदों का ग्रेड बढ़ाकर शीर्ष ग्रेड में लाया जाएगा। सभी जोनल एवं उत्पादन इकाइयों के महाप्रबंधक अब केंद्र के सचिव के समकक्ष होंगे। मंडल रेल प्रबंधकों एवं महाप्रबंधकों की नियुक्ति में सेवाओं का कोटा भी खत्म हाे जाएगा। सिर्फ योग्यता एवं क्षमता के आधार पर सक्षम लोगों को नियुक्ति मिलेगी। 2021 से होने वाली भर्ती परीक्षाओं में आईआरएमएस के कैडर में अधिकारियों की भर्ती हाेगी। भारतीय रेलवे चिकित्सा सेवा को अब भारतीय रेलवे स्वास्थ्य सेवा कहा जाएगा।

7 राज्यों में चलेगा भूजल प्रबंधन का अटल जल कार्यक्रम
सरकार ने सात राज्यों में भूजल प्रबंधन एवं पानी के किफायती उपयोग का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम अटल जल शुरु करने को भी मंजूरी दी। इसके लिए सरकार 6000 करोड़ रुपए देगी और 6000 करोड़ रुपए विश्व बैंक से आएंगे। यह कार्यक्रम मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और हरियाणा में 8350 गांवों में लोगों एवं किसानों के सहयोग से चलेगा।

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