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सायरस मिस्त्री फिर से टाटा सन्स के चेयरमैन बनाए जाएं, उन्हें हटाना गलत था: नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल

  • चेयरमैन पद पर एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति गैरकानूनी थी: अपीलेट ट्रिब्यूनल
  • फैसले के खिलाफ अपील के लिए टाटा सन्स को 4 हफ्ते का वक्त मिला
  • मिस्त्री अक्टूबर 2016 में टाटा सन्स के चेयरमैन पद से हटाए गए थे
  • टाटा सन्स के बोर्ड ने मिस्त्री पर भरोसा नहीं होने की वजह से उन्हें हटा दिया था
  • मिस्त्री की दलील- यह कार्रवाई कंपनीज एक्ट के नियमों के खिलाफ थी

नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने बुधवार को सायरस मिस्त्री के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि मिस्त्री फिर से टाटा सन्स के चेयरमैन बनाए जाएं, उन्हें हटाना गलत था। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में केस हारने के बाद मिस्त्री अपीलेट ट्रिब्यूनल पहुंचे थे। अपीलेट ट्रिब्यूनल ने टाटा सन्स के चेयरमैन पद पर एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को भी गलत बताया। चंद्रशेखरन जनवरी 2017 में चेयरमैन बने थे। अपीलेट ट्रिब्यूनल ने रतन टाटा को निर्देश दिए हैं कि टाटा सन्स के मामलों से दूर रहें। इस फैसले के खिलाफ अपील के लिए टाटा सन्स ने 4 हफ्ते का वक्त मांगा। अपीलेट ट्रिब्यूनल ने इसकी मंजूरी दे दी। टाटा सन्स टाटा ग्रुप की कंपनियों की प्रमोटर है।

जुलाई 2018 में कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने मिस्त्री का दावा खारिज किया था
सायरस मिस्त्री अक्टूबर 2016 में टाटा सन्स के चेयरमैन पद से हटाए गए थे। इसके दो महीने बाद मिस्त्री की ओर से उनके परिवार की दो इन्वेस्टमेंट कंपनियों- सायरस इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड और स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्प ने टाटा सन्स के फैसले को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की मुंबई बेंच में चुनौती दी थी। इन कंपनियों की दलील थी कि मिस्त्री को हटाने का फैसला कंपनीज एक्ट के नियमों के मुताबिक नहीं था। उन्होंने टाटा सन्स के मैनेजमेंट में खामियों और रतन टाटा के दखल का आरोप भी लगाया था। लेकिन जुलाई 2018 में कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने दावे खारिज कर दिए। इसके बाद मिस्त्री ने खुद फैसले के खिलाफ अपील की थी।

मिस्त्री परिवार के पास टाटा सन्स के 18.4% शेयर

कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने 9 जुलाई 2018 के फैसले में कहा था कि टाटा सन्स का बोर्ड सायरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटाने के लिए सक्षम था। मिस्त्री को इसलिए हटाया गया क्योंकि कंपनी बोर्ड और बड़े शेयरधारकों को उन पर भरोसा नहीं रहा था। 2012 में रतन टाटा के रिटायर होने के बाद सायरस मिस्त्री टाटा सन्स के छठे चेयरमैन बने थे। मिस्त्री परिवार के पास टाटा सन्स की 18.4% हिस्सेदारी है।

टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में 4% तक गिरावट
एनसीएलएटी के फैसले के बाद टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में बिकवाली तेज हो गई। टाटा मोटर्स बीएसई पर 3.05% गिरावट के साथ 174.70 रुपए पर बंद हुआ। टाटा ग्लोबल बेवरेजेज 4.14% नुकसान के साथ 311.80 रुपए पर बंद हुआ। टाटा पावर ने 0.98% नीचे 55.50 रुपए पर कारोबार खत्म किया।

टाटा-मिस्त्री विवाद : 3 साल में कब-क्या हुआ?

24 अक्टूबर 2016सायरस मिस्त्री को टाटा सन्स के चेयरमैन पद से हटाया, रतन टाटा अंतरिम चेयरमैन बनाए गए।
25 अक्टूबर 2016मिस्त्री ने टाटा सन्स बोर्ड को चिट्ठी लिखी, टाटा ट्रस्ट के प्रबंधन पर दखल का आरोप लगाया।
19 दिसंबर 2016मिस्त्री ने टाटा ग्रुप की सभी कंपनियों के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दिया।
20 दिसंबर 2016सायरस मिस्त्री ने एनसीएलटी में याचिका दायर की, टाटा सन्स पर गलत प्रबंधन का आरोप लगाया।
12 जनवरी 2017एन चंद्रशेखरन टाटा सन्स के चेयरमैन बनाए गए।
6 फरवरी 2017मिस्त्री टाटा सन्स बोर्ड के डायरेक्टर पद से हटाए गए।
21 सितंबर 2017टाटा सन्स को प्राइवेट कंपनी बनाने का प्रस्ताव बोर्ड ने मंजूर किया।
9 जुलाई 2018एनसीएलटी ने सायरस मिस्त्री की याचिका खारिज की।
3 अगस्त 2018मिस्त्री ने एनसीएलटी के फैसले को एनसीएलएटी में चुनौती दी।
24 अगस्त 2018एनसीएलएटी ने टाटा सन्स से कहा- मिस्त्री पर शेयर बेचने का दबाव नहीं बनाएं।
18 दिसंबर 2019एनसीएलएटी ने मिस्त्री की बहाली का आदेश दिया, टाटा सन्स को अपील के लिए 4 हफ्ते का वक्त।

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