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चंद्रयान-3 प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली, चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर सात साल काम करेगा- चेयरमैन सिवन

  • इसरो प्रमुख के. सिवन ने बताया- देश के दूसरे स्पेस पोर्ट बनाने के लिए तमिलनाडु के तुतुकुडी में भूमि अधिग्रहण का कार्य शुरू
  • ‘चंद्रयान-2 के दौरान हमने लैंडर को उतारने का बेहतर प्रयास किया था, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया था’

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) प्रमुख के.सिवन ने बुधवार को बताया कि सरकार ने चंद्रयान-3 प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इस पर काम शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि दूसरे स्पेस पोर्ट के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण का काम शुरुआती दौर में है। यह पोर्ट तमिलनाडु के तुतुकुडी में बनेगा।

इसरो प्रमुख ने बताया, “हमने चंद्रयान-2 मिशन के दौरान बेहतर प्रयास किया था, लेकिन उसे चांद की सतह पर नहीं उतार पाए थे। हालांकि, इसका ऑर्बिटर बेहतर तरीके से काम कर रहा है। यह ऑर्बिटर सात साल तक डेटा

उपलब्ध कराएगा।”

इसरो ने कहा- हमारी योजना 25 से ज्यादा मिशन लॉन्च करने की

उन्होंने बताया कि गगनयान मिशन के लिए चार लोगों को चुना गया है। सभी अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण इस महीने के तीसरे सप्ताह में शुरू होगा। गगनयान सलाहकार समिति का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि इस साल हमारी 25 से ज्यादा मिशन लॉन्च करने की योजना है।

उन्होंने बताया, “2019 में हमारी मुख्य रणनीति इसरो को विस्तार देना था। हम चाहते थे कि इसरो का क्षैतिज विस्तार हो। दूसरी रणनीति थी कि हम अपने क्षमता का विस्तार करें। वहीं तीसरी रणनीति इसरो में शारीरिक कार्यों में कटौती करनी थी।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा था- भारत 2020 में चंद्रयान-3 लॉन्च करेगा

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने संसद के शीतकालीन सत्र में दिए गए लिखित जवाब में बताया था कि भारत 2020 में चंद्रयान-3 लॉन्च करेगा और इसकी लागत चंद्रयान-2 से कम होगी। उन्होंने कहा था कि चंद्रयान-2 को असफल कहना गलत होगा। इससे हमें बहुत कुछ सीखने को मिला। चांद की सतह पर उतरने का भारत का यह पहला प्रयास था। दुनिया का कोई भी देश पहली कोशिश में ऐसा नहीं कर पाया है।

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