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देश के 170 जिलों में कोरोना हॉटस्पॉट, वायरस से अब तक 392 लोगों की मौत

स्वास्थ्य मंत्रालय से बुधवार को राहत भरी खबर ये आई है कि देश में अब तक सामुदायिक संक्रमण का खतरा नहीं है. देश के सभी जिलों में कोरोना की गंभीरता का आकलन करने के बाद 20 अप्रैल से छूट दी जाएगी. देश में बुधवार को कोरोना बीमारों की तादाद बढ़कर 11 हजार 933 हो गई जबकि इस बीमारी से 392 लोगों ने अब तक दम तोड़ दिया है. हालांकि हौसला बढ़ाने वाली बात ये है कि एक हजार 344 मरीज ठीक होकर घर भी लौट आए हैं.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि कोरोना वायरस के लगभग 11.41 प्रतिशत रोगी संक्रमण से उबर चुके हैं और कुल 170 जिलों को हॉटस्पॉट के तौर पर चिन्हित किया गया है. जबकि 207 इलाकों की पहचान गैर-हॉटस्पॉट के रूप में की गई है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि कोरोना वायरस के मरीजों के ठीक होने की दर धीरे-धीरे बढ़ रही है और वर्तमान में 11.41 प्रतिशत मरीज बीमारी से उबर चुके हैं. उन्होंने कहा, हम कोविड-19 रोगियों के उपचार के लिए उचित प्रोटोकॉल का पालन करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.

राज्यों को दिशानिर्देश जारीस्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने कहा कि डोर-टू-डोर सर्वेक्षण करने के बाद कोविड-19 हॉटस्पॉट और ग्रीन जोन की पहचान की गई है. देशभर में कोरोना वायरस हॉटस्पॉट से निपटने के लिए राज्यों को दिशानिर्देश जारी किए गए हैं और विशेष टीमें नए मरीजों की तलाश करेंगी.

लव अग्रवाल ने जोर देकर कहा कि आवश्यक सेवाओं से संबंधित क्षेत्रों को छोड़कर लोगों के एकत्रित होने की अनुमति नहीं दी जाएगी. उन्होंने दोहराया कि अभी तक वायरस सामुदायिक स्तर पर यानी तीसरे चरण में नहीं पहुंचा है. हालांकि कुछ लोग स्थानीय स्तर पर संक्रमित जरूर हुए हैं.

WHO के साथ स्वास्थ्य मंत्री की बैठक

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बुधवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अधिकारियों के साथ कोरोना वायरस बीमारी से निपटने के उपायों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक उच्चस्तरीय बैठक की.

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और डब्लूएचओ ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए डब्ल्यूएचओ के राष्ट्रीय पोलियो निगरानी नेटवर्क और क्षेत्र के अन्य कर्मचारियों की एक व्यवस्थित साझेदारी का फैसला किया. इस दौरान डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, मेरा मानना है कि जब तक हमें इसकी कोई वैक्सीन या टीका नहीं मिल जाता, तब तक हमें सामाजिक टीकाकरण यानी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना चाहिए.

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