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इलेक्शन कमीशन ने सभी राजनीतिक दलों से 31 जुलाई तक सुझाव मांगे; बिहार में अक्टूबर-नवंबर में चुनाव होने हैं

कोरोनावायरस का असर देश में होने वाले चुनावों पर भी नजर आएगा। चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों से सुझाव मांगे हैं कि महामारी के बीच चुनाव प्रचार और जनसभाओं का तरीका क्या होना चाहिए? सभी पार्टियां 31 जुलाई तक सुझाव भेज सकती हैं।

आयोग ने कहा कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट-2005 के तहत गाइडलाइंस जारी की हैं। जैसे- पब्लिक प्लेस पर मास्क लगाना, सोशल डिस्टेंसिंग रखना। सार्वजनिक जगहों पर थर्मल स्कैनिंग और सैनिटाइजेशन भी जरूरी है। ऐसे में चुनाव प्रचार कैसे किया जाए?

बिहार की 9 पार्टियों ने वर्चुअल प्रचार के प्रस्ताव का विरोध किया
राज्य की 9 पार्टियों ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कोरोना संक्रमण के हालात पर चिंता जताई थी। बिहार के 13 करोड़ लोगों में 7.5 करोड़ वोटर हैं, जिनके बीच दो गज की दूरी तय करनी होगी। ऐसे में आयोग बिहार के लोगों को यह भरोसा दिलाए कि पूरी चुनाव प्रक्रिया कोरोना विस्फोट की वजह नहीं बनेगी।

पत्र में ये भी कहा गया कि बिहार में सिर्फ 34% लोगों के पास ही स्मार्ट फोन हैं। ऐसे में वर्चुअल चुनाव प्रचार का कोई मतलब नहीं। साथ ही पूछा कि क्या इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संभव है? चुनाव आयोग को पत्र लिखने वाले डेलिगेशन में राजद के साथ कांग्रेस, सीपीएम, सीपीआई, सीपीआई (एमएल), आरएलएसपी, वीआईपी, हम (से) और एलजेडी के नेता भी शामिल थे।

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