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गुजरात के एक परिवार में 1700 आयुष्मान कार्ड, छत्तीसगढ़ में एक परिवार के 57 लोगों ने आंख की सर्जरी भी करा ली

  • आयुष्मान भारत में फर्जीवाड़ा; 5 लाख रु. तक मुफ्त इलाज वाली योजना में चौंकाने वाले खुलासे
  • ये आंकड़े शुरुआती जांच के, अगर विस्तृत जांच हुई तो बड़े खुलासे होने की आशंका है

दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना ‘आयुष्मान भारत’ में फर्जीवाड़े के चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। योजना के तहत दो लाख से ज्यादा फर्जी गोल्डन कार्ड बना दिए गए हैं। ये दो लाख कार्ड नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) के ही आईटी सिस्टम ने पकड़े हैं। जांच अभी शुरुआती दौर में है, इसलिए माना जा रहा है कि विस्तृत जांच होने पर ये आंकड़ा काफी बढ़ सकता है। इन दो लाख लोगों में से कितनों ने योजना का फायदा उठाया, ये आंकड़ा अभी एनएचए को नहीं मिला है। हालांकि, एनएचए ने कुछ शुरुआती मामलों में कार्रवाई भी शुरू कर दी है। फर्जीवाड़े के कई उदाहरण हैं।

जैसे गुजरात के एक अस्पताल में आरोग्य मित्र ने एक ही परिवार के नाम पर 1700 लोगों के कार्ड बना दिए। ऐसे ही छत्तीसगढ़ के एएसजी अस्पताल में एक परिवार के नाम पर 109 कार्ड बन गए और इसमें से 57 ने आंख की सर्जरी भी करा ली। पंजाब में दो परिवार के नाम पर 200 कार्ड हंै। इसमें दूसरे राज्यों के लोग भी सदस्य बनाए गए हंै। मध्य प्रदेश में एक परिवार के 322 कार्ड बने हैं। {आयुष्मान योजना सितंबर 2018 में शुरू की गई थी। अब तक 70 लाख लोगों का इलाज हुआ है। 4,592 करोड़ रु. अस्पतालों को दिए जा चुके हैं।

आईटी सिस्टम से सामने आया सच

  •  अभी देशभर में 2 लाख से ज्यादा फर्जी कार्ड बनने की बात सामने आई 
  •  इसी कार्ड पर मिलता है 5 लाख रु. तक मुफ्त इलाज, पैसा सरकार देती है
  •  171 अस्पतालों ने हजारों फर्जी बिल भेजे, ज्यादातर चुकाए भी जा चुके हैं

यूपी, गुजरात समेत इन राज्यों में सबसे ज्यादा गड़बड़ी

उन लोगों के भी कार्ड बना दिए गए, जो दायरे में ही नहीं आते हैं
फर्जी कार्ड बनाकर पैसे वसूलने के ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तराखंड और झारखंड में सामने आए हैं। उन संपन्न लोगों के भी कार्ड बने हैं, जो योजना के दायरे में नहीं आते। इस बारे में एनएचए के डिप्टी सीईओ प्रवीण गेडाम ने बताया कि राज्यों से पूरा डेटा मंगाया गया है। उसके बाद ही फर्जीवाड़े की असल स्थिति सामने आएगी। अभी जो डेटा हमें मिला है, वह शुरुआती है। जरूरी नहीं कि सारे मामले फर्जी ही निकले। इसलिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया जाएगा।

संदेह में सैकड़ों अस्पताल, जिन्होंने पैसा वसूलने के लिए फर्जी बिल भेजे
एनएचए को शक तब हुआ जब निजी अस्पतालों ने लगातार बड़े-बड़े बिल सरकार को भेजने शुरू किए। शुरुआती जांच में ही 65 अस्पताल पकड़े गए, जिन्होंने फर्जी बिल भेजे थे। इन्हें बिलों का भुगतान भी किया जा चुका था। लेकिन, फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद सरकार ने इन अस्पतालों से 4 करोड़ रुपए का जुर्माना वसूल लिया है। फर्जी बिल भेजने वाले 171 अस्पतालों को योजना से बाहर कर दिया गया है। दूसरी ओर, मध्यप्रदेश के 700 और बिहार के 650 से ज्यादा बिलों को भी संदिग्ध पाया गया है। इन पर अभी कार्रवाई नहीं हुई है।

ऐसे-ऐसे घपले पकड़े गए
एक मरीज एक समय में दो अस्पतालों में भर्ती दर्शाया, दोनों का बिल भी वसूल लिया गया

झारखंड का एक मरीज एक ही समय में दो अस्पतालों में भर्ती दिखाया गया और दोनों अस्पताल की अोर से बिल भेजा गया। हैरानी की बात यह है कि सरकार ने पैसा अस्पतालों को ट्रांसफर भी कर दिया। बाद में एनएचए ने इस फर्जीवाड़े को पकड़ा। ऐसा ही एक केस छत्तीसगढ़ से सामने आया। वहीं, उत्तर प्रदेश के एक अस्पताल में अनोखा मामला सामने आया। वहां एक प्रोसिजर जो पहले ही सरकारी योजना के तहत मुफ्त है, उसका नाम बदल कर पैसे क्लेम कर लिए गए। ऐसे हजारों मामलों की स्क्रीनिंग जारी है।

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