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50 लाख यूजर वालों को रखना होगा नोडल अफसर

  •  इलेक्ट्राॅनिक, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंटरमीडियरी गाइडलाइन 2020 तैयार की 
  •  यह ड्राफ्ट गाइडलाइन-2011 का अपडेट वर्जन है, इसके लिए 500 से ज्यादा सुझाव मिले

फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप, टिकटॉक, शेयरइट जैसे सोशल मीडिया पर चलने वाले भद्दे और फेक कंटेंट पर लगाम के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने वाली है। इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रो‌‌‌द्यौगिकी मंत्रालय ने इससे संबंधित इंटरमीडियरी गाइडलाइन 2020 बनाई है। इसे कानून मंत्रालय भेजा जाएगा। कानूनी स्तर पर इसके परीक्षण के बाद 2-3 हफ्ते में फाइनल गाइडलाइन नोटिफाई की जाएगी।

मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस गाइडलाइन के बगैर सोशल मीडिया पर फैलने वाले अनुपयोगी कंटेंट को रोकना संभव नहीं है। फिलहाल यह तय नहीं है कि किसे पोर्नोग्राफी माना जाए, इसलिए सोशल मीडिया पर इससे संबंधित कार्रवाई खुलकर नहीं की जा सकती है। यह दुनियाभर की समस्या है। 


साल 2011 में इंटरमीडियरी गाइड लाइन बनी थी। इन्हें अब मौजूदा हालात के हिसाब से अपडेट किया जा रहा है। तब सोशल मीडिया एप या वेबसाइट का चलन ज्यादा नहीं था, न ही फेक न्यूज और हेट स्पीच का असर अधिक था।  2013 में गाइडलाइन लागू करने की व्यवस्था नहीं बन पाई। सुप्रीम कोर्ट ने कई केसों की सुनवाई के दौरान सरकार को सोशल मीडिया एप के संबंध में सख्त कदम उठाने को कहा था। सरकार ने दिसंबर 2018 में नई गाइडलाइन का ड्राफ्ट तैयार किया। इसके बाद इसे पब्लिक डोेमेन में रख दिया ताकि लोग इस पर सुझाव दे सकें। अब तक 500 से ज्यादा सुझाव मिले हैं। 

पॉक्सो एक्ट के तहत अवैध वीडियाे हटाने के लिए सोशल मीडिया बाध्य होगा

गाइडलाइन और उसका असर

वीडियो हटाएंगेे: पॉक्सो एक्ट के अनुसार गैरकानूनी वीडियो सोशल मीडिया-एप से हटाने होंगे। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के आधार पर सुरक्षा ढांचा तैयार करना होगा। रिपोर्ट करने पर सोशल मीडिया एप को 72 घंटे में वीडियो हटाना होगा। यूजर को इसकी जानकारी भी देनी होगी।


असर 

  • सोशल मीडिया जवाबदेह बनेगा। हालांकि, 72 घंटे ज्यादा समय है। इससे
  • ज्यादा नुकसान हो सकता है। समय सीमा सख्त बनानी होगी। अदालती आदेश की जरूरत पड़ी तो पेंच फंस सकता है।
  • देश में सुनेंंगे शिकायत: जिन सोशल मीडिया एप या वेबसाइट के 50 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर हैं, उन्हें भारत में अपना नोडल अफसर नियुक्त करना होगा। 

असर: भारत में कानूनी तरीके से शिकायतों का निपटारा करना होगा। रजिस्टर्ड यूजर की संख्या के आकलन के लिए पूर्ण कालिक नियामक की जरूरत भी होगी।

 नोडल अफसर की नियुक्ति कौन सी कंपनी करेगी। नियम तोड़ने पर किसकी जवाबदेही होगी। यह तय किए बिना नई गाइडलाइन का पालन कठिन होगा। – विराग गुप्ता, वकील, सुप्रीम कोर्ट

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