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Jan 8 2020 1:33PM 30-49 साल की महिलाओं में लगातार बढ़ रहा है सर्वाइकल कैंसर का खतरा

-डॉ कौस्तभ बसु-(कंसल्टेंट गाइनी आन्कोसर्जन, नारायणा हॉस्पिटल)

सर्वाइकल कैंसर आज महिलाओं की बहुत बड़ी समस्या बन चुका है. वर्ष 2018 में 60 हजार से ज्यादा महिलाओं की मौत इसके कारण हुई है. साथ ही 96 हजार से ज्यादा महिलाएं इसकी गिरफ्त में आयी हैं. सर्वाइकल कैंसर का कारण एचपीवी संक्रमण है. यह ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के कारण होता है. यह योनि के निचले हिस्से में पाया जाता है. आमतौर पर स्वस्थ महिलाओं में यह वायरस खुद ही बाहर हो जाता है, लेकिन कई महिलाओं में यह बना रह जाता है जिसके कारण उन्हें सर्वाइकल कैंसर होता है.

सर्वाइकल कैंसर के कारण

इसके अतिरिक्त और भी कई कारण हैं जो सर्वाइकल कैंसर के कारण बनते हैं, जिनमें प्रमुख है- अपर्याप्त स्वच्छता, असुरक्षित यौन संबंध, गर्भ निरोधक गोलियों का लंबे समय तक प्रयोग, धूम्रपान, ज्यादा बच्चों का होना और अनियंत्रित मधुमेह.

लक्षण

सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख लक्षण हैं मासिक धर्म के पश्चात भी रक्तस्राव, शारीरिक संबंध के बाद रक्तस्राव, मेनोपॉज के बाद रक्तस्राव, कमर तथा पीठ में दर्द एवं मूत्र मार्ग में संक्रमण.

इलाज

सर्वाइकल कैंसर अगर प्रारंभिक अवस्था में हो, तो इसका इलाज सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी के जरिये हो सकता है. ऐसे मामलों में पीड़ित की जान 80-90 प्रतिशत तक मामलों में बचायी जा सकती है. कैंसर ऐसे बीमारी है, जिसके इलाज से बेहतर है इसकी रोकथाम. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी यह सलाह देता है कि 30-49 की महिलाओं को तीन से पांच वर्ष में पैप स्मीयर की जांच करानी चाहिए. अधिक जोखिम वाले एचपीवी वायरस के लिए टीका उपलब्ध है. टीकाकरण की उचित उम्र 9-13 साल है.

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Written by Bhanu Pratap

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