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कोरोना वायरस: पहले लॉकडाउन से कितना अलग है दूसरा लॉकडाउन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को बीते 14 दिनों में चौथी बार राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश में जारी लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाने की घोषणा कर दी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार 24 मार्च को रात 8 बजे राष्ट्र को संबोधित करते हुए कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी को रोकने के लिए पूरे देश में ‘तालाबंदी’ की घोषणा की थी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी तो उन्होंने कहा था कि यह 21 दिन किसी शख़्स के 21 साल के भविष्य का फ़ैसला करेंगे.

प्रधानमंत्री ने कहा था कि यह लॉकडाउन हर राज्य, हर केंद्र शासित प्रदेश, हर ज़िले, गांव और मोहल्ले पर लागू होगा.

14 मार्च यानी आज पूरे हो रहे 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान यह देखा भी गया कि प्रशासन इसे हर जगह लागू करने के लिए तत्पर रहा.

21 दिनों का लॉकडाउन का पार्ट-1 आज पूरा हो जाएगा और कल से 19 दिनों का लॉकडाउन का पार्ट-2 शुरू होगा.

लॉकडाउन पार्ट-1 को लेकर दिए गए प्रधानमंत्री के पहले संबोधन के बाद देश की जनता में अफ़रातफ़र दिखी लेकिन दूसरे और तीसरे संबोधन में जो भी ‘टास्क’ प्रधानमंत्री ने जनता को करने के लिए कहा वो जनता ने शौक से किया भी.

पहला लॉकडाउन

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दूसरे राष्ट्र के नाम संदेश में जनता से अपील की थी कि वो कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ फ़्रटलाइन में खड़े लोगों के सम्मान में घर से थाली या ताली बजाएं.

इसके बाद देशभर से आए वीडियो में देखा गया कि लोगों ने इस काम को किया.

राष्ट्र के नाम तीसरे संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने देश की जनता से कोरोना वायरस महामारी के ख़िलाफ़ एक उमंग और जोश जगाने के लिए घर की बत्तियां बंद करके छत या दरवाज़े से दीप, टॉर्च, मोमबत्ती या मोबाइल की फ़्लैशलाइट जलाने की अपील की.

इस काम को भी देश की अधिकतर जनता ने शौक से किया. लॉकडाउन-2 में भी कुछ ऐसा होगा यह अभी नहीं कहा जा सकता है लेकिन प्रधानमंत्री ने कह दिया है कि देश की जनता फ़्रंटलाइन में खड़े कर्मियों का गौरव बढ़ाए.

हालांकि, 24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा के बाद खाने-पीने के सामान की ख़रीदारी को लेकर दुकानों के आगे लंबी कतारें लगना हो या फिर पैदल अपने घरों को निकल चले मज़दूर हों, ऐसी तस्वीरें भी देखने को मिलीं.

दिल्ली के आनंद विहार बस अड्डे के आगे प्रवासी मज़दूरों की भीड़ ने देश क्या दुनिया को हिलाकर रख दिया. इसके बाद दिल्ली और यूपी की सरकारों में आरोप-प्रत्यारोपों का दौर भी शुरू हुआ.

इन सबके लिए केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना भी हुई कि उसने पूर्वनियोजित आधार पर लॉकडाउन क्यों नहीं किया.

हालांकि, लॉकडाउन बढ़ाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को जो घोषणा की उसमें उन्होंने साफ़ कहा कि इसका फ़ैसला राज्य सरकारों और स्वास्थ्यकर्मियों की सलाह पर किया जा रहा है.

लॉकडाउन के बाद प्रधानमंत्री मोदी और राज्य के मुख्यमंत्रियों के बीच दो बैठकें भी हुईं. इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने पहले घोषणा कर दी थी कि कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करेंगी.

केंद्र सरकार ने 15,000 करोड़ रुपये के अलग पैकेज की घोषणा भी की जिसका इस्तेमाल सिर्फ़ पीपीई, टेस्टिंग किट्स, आइसोलेशन वॉर्ड, आईसीयू और वेंटिलेटर के लिए होना था.

वहीं, अभी भी देश के कई हिस्सों में मज़दूर और आम लोग फंसे हुए हैं. यह अभी साफ़ है कि लॉकडाउन-1 की तरह ही लॉकडाउन-2 में उन मज़दूरों को घर भेजने के लिए सरकार की कोई योजना नहीं है.

हालांकि, प्रवासी मज़दूरों और ग़रीबों के लिए राज्य सरकारों ने शेल्टर होम्स की व्यवस्था की है और उन्हें वहां पर खाना मुहैया कराया जा रहा है.

कैसे अलग है लॉकडाउन पार्ट-2

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन बढ़ाने के लिए जो राष्ट्र को संबोधन दिया वो लगभग 26 मिनट का था जबकि 24 मार्च को पहली बार राष्ट्र को दिया गया संबोधन 29 मिनट लंबा था.

पहले राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि लोग परेशान होकर ख़रीदारी न शुरू कर दें क्योंकि इस दौरान ज़रूरी चीज़ों पर कोई रोक नहीं होगी बल्कि ज़रूरत के सामान की आपूर्ति पहले की तरह ही चालू रहेगी.

लॉकडाउन बढ़ाने को लेकर दिए गए भाषण में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोहराया कि देश में अनाज और दवाओं की कमी नहीं है इसलिए परेशान होने की ज़रूरत नहीं है.

इसके अलावा पहले की तरह ही खाने-पीने के ज़रूरी सामानों और दवाइयों की ख़रीदारी के लिए कोई रोक नहीं होगी.

बसें या ट्रेनें चलेंगी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले और दूसरे दोनों भाषणों में बसों और ट्रेनों का ज़िक्र नहीं किया था.

उन्होंने पहले भाषण में कहा था कि देश में सबकुछ बंद रहेगा. इसके बाद रेलवे ने 31 मार्च तक अपनी सभी ट्रेनें रद्द कर दी थीं जिसके बाद इसे बढ़ाकर 14 अप्रैल कर दिया था.

रेल मंत्रालय ने ये साफ़ कर दिया है कि मालगाड़ियों को छोड़कर सभी तरह की ट्रेनों का परिचालन 3 मई की आधी रात तक के लिए बंद कर दिया गया है.

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ान को भी 3 मई तक बंद रखने की घोषणा की है.

वहीं, राज्य सरकारों ने अपने यहां सभी तरह की अंतरराज्यीय सेवाओं को बंद कर रखा है. वो केवल ज़रूरी सेवाओं में लगे कर्मचारियों के लिए अपनी ‘सिटी बसें’ चला रही है.

दिल्ली, केरल, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्य अपने यहां लॉकडाउन को 30 अप्रैल तक बढ़ा चुके हैं. इसलिए इन शहरों में अंतरराज्यीय बस सेवाएं आगे भी नहीं चलेंगी.

किन इलाक़ों को मिलेगी छूट?

प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से अपील की कि वो अनुशासन का पालन करें, हॉटस्पॉट पर नज़र रखें क्योंकि नए हॉटस्पॉट नहीं बनने देने हैं.

पहले लॉकडाउन की घोषणा के बाद कई राज्यों में पुलिस की सख़्ती देखने को मिली थी.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि अगले एक सप्ताह के लिए और सख़्ती की जाएगी.

उन्होंने बताया कि 20 अप्रैल तक देश के हर गली, मोहल्ले को बारीकी से परखा जाएगा कि लॉकडाउन का कैसे पालन हो रहा है और जहां कोरोना वायरस के मामले नहीं होंगे, उन इलाक़ों को कुछ छूट दी जाएगी.

यह छूट सशर्त दी जाएगी और अगर ये शर्तें टूटेंगी तो उनसे छूट छीन ली जाएगी. एक प्रकार से लोगों पर ज़िम्मेदारी है कि वो नियमों में रहें.

किन इलाक़ों को किन नियमों और प्रक्रिया के बाद छूट दी जाएगी इसकी घोषणा सरकार बुधवार को करेगी.

हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में साफ़ किया कि यह फ़ैसला ग़रीब और मज़दूर लोगों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है और जिन इलाक़ों को 20 अप्रैल के बाद छूट दी जाएगी उसमें कुछ व्यावसायिक गतिविधियां की जा सकती हैं.

किसानों को क्या छूट?

25 मार्च के बाद शुरू हुए लॉकडाउन के दौरान देश के किसानों में भी अफ़रातफ़री थी. वो खेतों में खड़ी रबी की फसल की कटाई के इंतज़ार में थे. हालांकि, कुछ ही दिनों में सभी राज्यों ने अपने यहां किसानों को कृषि गतिविधियों के लिए छूट दे दी थी.

आज दिए अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि रबी फसल की कटाई और कुछ कृषि गतिविधियां किसान चालू रखें.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण योजना का ज़िक्र करते हुए कहा कि इस योजना से ग़रीबों की मदद जारी रहेगी.

ग़ौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लॉकडाउन-1 की शुरुआत के दूसरे ही दिन विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा कर दी थी.

इसके तहत 80 करोड़ ग़रीबों को अगले तीन महीने तक मुफ़्त आटा या चावल और एक किलो दाल देने की घोषणा की गई थी.

1.70 लाख करोड़ रुपए के इस पैकेज में किसानों के लिए भी घोषणा की गई थी. इसके तहत किसानों के खाते में हर महीन 2,000 रुपए डालने की बात कही गई थी.

लॉकडाउन-2 भाषण में और क्या अलग था?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को दिए भाषण में बताया कि देश के पास इस समय एक लाख से अधिक बेड हैं और 600 से अधिक अस्पताल केवल कोरोना वायरस पर ही काम कर रहे हैं.

उन्होंने युवा वैज्ञानिकों से अपील की कि वो आगे आएं और कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ वैक्सीन बनाने में मदद करें ताकि विश्व का कल्याण हो सके.

हालांकि, लोगों के कोरोना वायरस के टेस्ट को लेकर सरकार की आलोचना होती रही है.

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) का कहना है कि उसकी क्षमता हर रोज़ 13,000 टेस्ट करने की है और वो हर दिन 25,000 टेस्ट तक कर सकता है.

हालांकि, आईसीएमआर का कहना है कि वो अपनी क्षमता 1,00,000 टेस्ट प्रतिदिन करना चाहता है जिसके लिए उसे टेस्ट किट की ज़रूरत है जो अगले कुछ दिनों में चीन से आने वाली है.

कोरोना वायरस की फैली महामारी में भारत में टेस्टिंग का यह हाल है कि आईसीएमआर ने 6 अप्रैल को बताया था कि वो सिर्फ़ 1.01 लाख सैंपल की जांच ही कर पाया है.

लॉकडाउन पार्ट-2 में टेस्टिंग कितनी तेज़ होगी यह तो वक़्त ही बताएगा लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों को कहा है कि वो धैर्य बनाकर रखें क्योंकि वो उनका साथ मांग रहे हैं.

उन्होंने कहा कि वो 7 बातों में साथ मांग रहे हैं-

1. बुज़ुर्गों का ख़ास ख़याल रखें, जिनको दूसरी बीमारियां हैं उन पर अधिक ध्यान दें.

2. लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की लक्ष्मण रेखा को न लाघें, घर में बने मास्क का इस्तेमाल करें.

3. आयुष मंत्रालय द्वारा सुझाए गए उपायों से इम्युनिटी बढ़ाएं.

4. आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप ज़रूर डाउनलोड करें.

5. जितना हो सके ग़रीब परिवारों की देखरेख करें.

6. व्यवसाय-उद्योग में काम करने वालों को नौकरी से न निकालें.

7. कोरोना योद्धाओं जैसे कि स्वास्थ्यकर्मी, सफ़ाईकर्मी, पुलिस, सुरक्षाबल आदि का सम्मान करें, आदर करें और उनका गौरव बढ़ाएं.

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