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कुरुक्षेत्र रहेगा सूर्यग्रहण का केंद्र, शोध के लिए पहुंची ISRO की टीम

देशभर में सूर्यग्रहण दिखाई देगा लेकिन धर्मनगरी कुरुक्षेत्र सूर्य ग्रहण मुख्य केंद्र रहेगा। पांच हजार साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जिसमें ग्रहण का केंद्र कुरुक्षेत्र है। संत-महात्मा इसे विलक्षण सूर्य ग्रहण बता रहे हैं। इससे पहले भगवान श्रीकृष्ण ने जब द्वारका से आकर गोपियों संग स्नान किया था, तब ऐसा संयोग बना था।

लिहाजा इस बार वैश्विक महामारी कोरोना को देखते हुए हरियाणा सरकार ने मेला आयोजन को रद्द कर दिया है। मगर परंपरा न टूटे इसको लेकर चंद संत-महात्माओं को स्नान की अनुमति दी गई है। स्नान के साथ पहली बार ब्रह्मसरोवर के तट पर अनुष्ठान भी होगा। रविवार को सुबह 10 बजकर 20 मिनट पर ग्रहण आरंभ होगा और 13 बजकर 47 मिनट 14 सेकेंड तक रहेगा। ग्रहण का मध्य 12 बजकर 29 मिनट पर होगा और इसका मोक्ष 2 बजकर 7 मिनट पर होगा। ग्रहण की अवधि करीब तीन घंटे 26 मिनट की रहेगी।

कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने बताया कि परंपरा को निभाने के लिए पूजा और अनुष्ठान ब्रह्मसरोवर पर होगा। अनुष्ठान में मथुरा के रमणरेती स्थित कार्ष्णि आश्रम के संचालक स्वामी गुरुशरणानदं महाराज, पथमेड़ा गोशाला राजस्थान के संचालक दत्त शरणानंद महाराज, मल्लू पीठाधीश्वर के संचालक राजेंद्र दास व गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज हिस्सा लेंगे।

कुरुक्षेत्र में दिखाई देने वाले कंगनाकार सूर्य ग्रहण पर इसरो शोध कर रहा है। वैज्ञानिकों की टीम कुरुक्षेत्र पहुंच चुकी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस धर्मनगरी में रिंग ऑफ फायर यानि वलयाकार सूर्यग्रहण दिखाई देगा। इसमें चंद्रमा की छाया पूरी तरह से सूर्य को ढक नहीं पाएगी। इससे सूर्य का बाहरी हिस्सा आग के छल्ले के समान नजर आएगा। ऐसा संयोग 11 साल बाद दिखाई दे रहा है। इससे पहले दक्षिणी भारत के कुछ हिस्सों में यह दृश्य नजर आया था।

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