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विधायक मेंदोला को मंत्री नहीं बनाने पर समर्थकों का छलका दर्द, बोले- विष तो रमेशजी ने पिया, एक कार्यकर्ता ने आत्मदाह की कोशिश की

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल का गुरुवार को विस्तार हो गया। भाजपा के आठ बार के विधायक और शिवराज की पिछली सरकारों में मंत्री रहे गोपाल भार्गव ने सबसे पहले शपथ ली। मंत्रिमंडल विस्तार में 20 कैबिनेट और 8 राज्यमंत्री मंत्री बनाए गए। कैबिनेट में भाजपा के 12, सिंधिया गुट के 5 और कांग्रेस छोड़कर आए 3 नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। मंत्रिमंडल में एक नाम ना पाकर कई कार्यकर्ता दुखी और गुस्से में हैं। वह नाम है- इंदौर के दो नंबर क्षेत्र से विधायक रमेश मेंदोला का। मेंदोला को मंत्री नहीं बनाने पर जहां एक समर्थक ने आत्मदाह की कोशिश की। वहीं, कई ने सड़क पर उतरने और पार्टी छोड़ने तक की बात कह डाली है।

विधायक रमेश मेंदोला के मंत्री नहीं बनने से नाराज भाजपा नेता सुमित हार्डिया ने भाजपा कार्यालय पर आत्मदाह की कोशिश की। केन में केरोसिन लेकर पहुंचे हार्डिया ने शरीर पर पूरी केन उड़ेल ली और आग लगाने की कोशिश की। इस दौरान वे मेंदोला के समर्थन में नारे लगाते रहे। वहां मौजूद भाजपाइयों ने उन्हें पकड़ा। सिरोडकर ने कहा कि हार्डिया ने दादा के मंत्री बनने को लेकर बहुत-सी तैयारी कर रखी थी। साढ़े 3 बजे के करीब सूचना मिली कि वह ऐसा करने वाले हैं। इस पर तत्काल हम मौके पर पहुंचे और उसे रोका। उन्होंने कहा कि हम पार्टी लाइन से चलने वाले लोग हैं।  

2008 से लगातार विधायक, सबसे ज्यादा वोटों ने जीतने का रिकाॅर्ड

विधायक रमेश मेंदोला का नाम भाजपा के बड़े नेताओं में गिना जाता है। वे भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेहद करीबी हैं। वे इंदौर विधानसभा- 2 से 2008 से लगातार जीतते आ रहे हैं। उनके नाम मप्र में सबसे ज्यादा वोटों से जीतने का रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने पिछला चुनाव 71000 से अधिक मतों से जीता था। इसके बाद भी मंत्री नहीं बनाए जाने से समर्थकों में नाराजगी है। हालांकि, विधायक मेंदोला ने ट्वीट कर सभी नवनिर्वाचित मंत्रियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी। 

सिलोडकर बोले – वे संकट की घड़ी में हमेशा पार्टी के साथ खड़े रहे
भाजपा नेता राजेश सिलोडकर ने कहा कि रमेश मेंदोला मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा वोटों से जीतने वाले विधायक हैं। उन्होंने हमेशा संकट की घड़ी में भाजपा के लिए लड़ा है। उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल नहीं करना कहीं ना कहीं इंदौर का भी दुर्भाग्य है और कार्यकर्ताओं में भी निराशा है। हर कार्यकर्ता यह चाहता था कि मेंदोला को मंत्री बनाया जाए। उन्हें मंत्री क्यों नहीं बनाया गया, यह चिंता का विषय है। कार्यकर्ताओं की नाराजगी को लेकर कहा कि मेंदोला को मंत्री नहीं बनाने पर हर कार्यकर्ता दुखी है। इसीलिए वे अपनी पीड़ा जाहिर कर रहे हैं। ऐसा नेता शायद ही हो, जो कोरोनाकाल में भी एक-एक घर जाकर लोगों से बात कर रहे थे। हर जरूरतमंद की उन्होंने मदद की है। अपनी पोस्ट को उन्होंने कहा कि जैसा मुख्यमंत्री ने कहा था कि मैंने विष का प्याला पिया और अमृत मंथन किया। विष तो वाकई में रमेश मेंदोला ने पिया है। केंद्रीय नेतृत्व को इस पर चिंतन करना चाहिए।

सोशल मीडिया पर समर्थकों की प्रतिक्रिया

  • राजेश सिरोडकर ने लिखा – विष तो रमेशजी ने पिया, आपने कहां शिवराजजी…
  • एक समर्थक ने लिखा- विष तो रमेशजी ने पिया शिवराजजी, जिस दिन हमारे दादा का आदेश होगा, उस दिन हम भी सड़कों पे उतरेंगे। हम भी पार्टी छोड़ने को तैयार हैं। दादा के लिए, परंतु दादा ने कभी किसी को गद्दारी करना नहीं सिखाया, वरना आज माहौल कुछ अलग होता, लेकिन भाजपा मजबूर कर रही है माहौल बदलने पर। दादा की वजह से इंदौर और कहूं तो मप्र में भाजपा का नाम है। लोग कहते हैं विधायक हो तो रमेश मेंदोला जैसा, पर पार्टी इस बात को पता नहीं कब समझेगी। शायद जब दादा अपने रौद्र रूप में आएंगे तब।
  • कार्यकर्ता के दिलों पर राज करने वाला, हर जगह भाजपा के लिए अंगद बन कर खड़े रहने वाले दादा को मंत्रिमंडल में न लेना भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए बड़ा आघात है।

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