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लोन की किश्त चुकाने में छूट की स्कीम 3 महीने बढ़ाई, कर्ज सस्ते करने के लिए रेपो रेट 0.40% कम किया

आम आदमी और कारोबारियों पर लॉकडाउन के असर को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने आज अहम घोषणाएं कीं। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि लोन की किश्त चुकाने में 3 महीने की जो छूट मार्च में दी गई थी, उसे अगले 3 महीने और बढ़ा रहे हैं। कर्ज सस्ते करने के लिए प्रमुख ब्याज दर रेपो रेट 0.40% कम किया गया है, ताकि लोन और सस्ते हों।

 
आरबीआई के फैसलों को ऐसे समझें-
1. जिन्होंने कर्ज ले रखा है, उन्हें ईएमआई पेमेंट में छूट दी
आरबीआई ने मार्च में ऐलान किया था कि लोन की किश्त चुकाने में 3 महीने की छूट दी जाएगी। अब इसे 3 महीने और बढ़ा दिया है। यानी बैंकों को अगस्त तक लोन की ईएमआई वसूलने से रोक दिया है। ग्राहक खुद चाहें तो भुगतान कर सकते हैं, बैंक दबाव नहीं डालेंगे।

मायने : अगले 3 महीने तक ऐसे किसी भी व्यक्ति के खाते से किश्त नहीं कटेगी, जिन्होंने कर्ज ले रखा है। अगस्त किश्त नहीं भरेंगे तो इसे डिफॉल्ट नहीं माना जाएगा। हालांकि, इसके ये मायने नहीं हैं कि बकाया कभी चुकाना ही नहीं होगा, बल्कि बाद में पेमेंट करना होगा। यह उन लोगों को राहत देने के लिए है जिनके पास लॉकडाउन की वजह से वाकई नकदी की कमी हो गई है।

2. कर्ज सस्ते करने के लिए रेपो रेट घटाया
रेपो रेट पहले 4.40% था, अब 0.40% घटाकर 4 कर दिया गया है। रेपो रेट वह दर है, जिस पर बैंकों को आरबीआई से कर्ज मिलता है। बैंकों को सस्ता कर्ज मिलेगा तो वे ग्राहकों के लिए भी रेट घटाएंगे।

3. बैंक ज्यादा कर्ज बांटे, इसलिए रिवर्स रेपो रेट कम किया
इस रेट को 3.75% से घटाकर 3.35% कर दिया है। रिवर्स रेपो रेट यानी बैंकों को अपना पैसा आरबीआई के पास रखने से जो ब्याज मिलता है। इस रेट में कमी आने से बैंक आरबीआई के पास ज्यादा पैसा रखने की बजाय कर्ज ज्यादा बांटेंगे, इससे बाजार में नकदी बढ़ेगी।

पीएमआई 11 साल के निचले स्तर पर: दास

  • कोरोनावायरस की वजह से दुनिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ है। अप्रैल में ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई घटकर 11 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीओ के मुताबिक, दुनिया में कारोबार इस साल 13-32% तक घट सकता है। 
  • दो महीने के लॉकडाउन से देश में आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इंडस्ट्री वाले टॉप-6 राज्यों के ज्यादातर इलाके रेड और ऑरेंज जोन में हैं। इन राज्यों की इंडस्ट्री का आर्थिक गतिविधियों में 60% कॉन्ट्रिब्यूशन होता है।
  • कोरोना के असर को देखते हुए 2020-21 की पहली छमाही में जीडीपी ग्रोथ निगेटिव रहने का अनुमान है। दूसरी छमाही में कुछ तेजी आ सकती है।
  • आरबीआई लगातार हालात पर नजर रख रहा है। इकोनॉमी के सभी सेगमेंट पर हमारी टीम की नजर है। फरवरी में हमने कहा था कि कोरोना की वजह से ग्लोबल ग्रोथ में गिरावट आएगी। तब से आरबीआई ने लिक्विडिटी के मोर्चे पर कई फैसले लिए।

पिछले दो महीनों में तीसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस

कोरोनावायरस संबंधी उपायों से निपटने के लिए पिछले दो महीनों में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की यह तीसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस है। आरबीआई गवर्नर ने पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस 27 मार्च और दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस 17 अप्रैल को की थी। इन दोनों प्रेस कॉन्फ्रेंस में गवर्नर ने अर्थव्यवस्था में तेजी लाने और बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए कई उपायों की घोषणा की थी।

सरकार कर चुकी है करीब 21 लाख करोड़ के प्रोत्साहन पैकेज का ऐलान
कोरोना आपदा से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने करीब 21 लाख करोड़ रुपए के आत्मनिर्भर भारत प्रोत्साहन पैकेज का ऐलान किया है। इसमें गरीब मजदूरों को नकद कैश और अनाज, एमएसएमई को 3 लाख करोड़ रुपए की क्रेडिट गारंटी, एनबीएफसी-एमएफआई को क्रेडिट गारंटी, मनरेगा मजदूरों के लिए अतिरिक्त आवंटन समेत किसानों के लिए कई उपाय किए गए हैं। यह प्रोत्साहन पैकेज भारत की जीडीपी के करीब 10.5 फीसदी के बराबर है।

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