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मोदी ने कहा- लॉकडाउन में जो जहां था, वहीं मदद पहुंचाई श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाईं

गांवों के कोरोना से लड़ने के तरीके से शहरों को सीख मिली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गरीब कल्याण रोजगार अभियान की शुरुआत की। बिहार के खगड़िया जिले के तेलिहार गांव से योजना से शुरुआत हुई। उन्होंने कहा कि लद्दाख में हमारे वीरों ने जो बलिदान दिया, उस पर सेना को तो गर्व है ही। पराक्रम बिहार रेजीमेंट ने किया है, इसलिए हर बिहारी को इसका गर्व होता है। जिन वीरों ने देश के लिए बलिदान दिया है, उनके लिए नमन करता हूं। उनके परिवारों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि देश उनके साथ है।

मोदी के भाषण के मुख्य प्वॉइंट

गांवों ने शहर को सिखाया

जब कोरोना महामारी का संकट बढ़ना शुरू हुआ तो आप सभी लोग राज्य और केंद्र सरकार की चिंताओं में बने हुए थे। हमने अपने श्रमिक भाई बहनों के लिए स्पेशल ट्रेन भी चलाईं। कोरोना का इतना बड़ा संकट, जिसके कारण दुनिया सहम गई, लेकिन आप डटकर ठहर गए। भारत के गांवों ने कोरोना का जिस तरह मुकाबला किया है उसने शहरों को भी सबक दिया है। कोरोना संक्रमण को आप सब ग्रामवासियों ने बहुत ही प्रभावी तरीके से रोका है। गांवों की जनसंख्या 80-85 करोड़ हैं, जो पूरे यूरोप, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया से ज्यादा है। इस जनसंख्या का कोरोना से मुकाबला करना बहुत बड़ी बात है। पंचायत तक हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं, चिकित्सा सुविधाएं, वेलनेस सेंटर स्वच्छता अभियान की अहम भूमिका रही है।

नई मशीन से हर दिन कोरोना के 1500 टेस्ट होंगे
मुझे बताया गया है कि परसों से पटना में कोरोना टेस्टिंग की बड़ी आधुनिक टेस्टिंग मशीन शुरू होने वाली है। इस मशीन से हर दिन करीब 1500 टेस्ट संभव होंगे। आज गरीब के कल्याण के लिए उसके रोजगार के लिए बहुत बड़ा अभियान शुरू हुआ है। यह हमारे श्रमिक भाई-बहनों के लिए गांव में रहने वाले नौजवानों को समर्पित हैं। इनमें वे लोग शामिल हैं, जो लॉकडाउन में अपने गांव लौटे हैं। 

बिहार लौटे मजदूरों से बात भी की
मोदी ने दिल्ली से लौटीं स्मिता कुमारी से बात की। स्मिता ने बताया कि गांव में इंटर तक पढ़ाई की है। लॉकडाउन के समय दिल्ली में थे, वहां फैक्ट्री में काम करते थे, स्पेशल ट्रेन से गांव लौटे। मोदी ने पूछा कि लौटने में कोई दिक्कत नहीं हुई? मेरे लिए शिकायत तो नहीं है? कोई तो होगी, आप बताती नहीं हो? लगता होगा दिल्ली में अच्छे थे, मोदी जी ने ऐसा कर दिया कि हमें घर आना पड़ा। स्मिता ने कहा कि मैं गांव में शहद बनाने का काम शुरू करने का सोच रही हूं।

जनार्दन शर्मा: गुड़गांव में 12 साल से चुनाई का काम करते थे। कोरोना महामारी हो गई, इसलिए घर लौट आए। स्पेशल ट्रेन से घर लौटे। ट्रेन में भी दूर-दूर बैठे, सभी ने मास्क लगाए थे।

क्या है गरीब कल्याण रोजगार अभियान
इसका मकसद कामगारों को उनकी रुचि और कौशल के तहत रोजगार और स्वरोजगार उपलब्ध कराना।

बिहार में सबसे ज्यादा 32 जिले शामिल
इस अभियान के तहत सरकार ने 6 राज्यों के 116 जिलों को चुना गया है। इनमें करीब 88 लाख प्रवासी मजदूर अन्य राज्यों से लौटे हैं। इन 116 जिलों में बिहार में 32, उत्तर प्रदेश में 31, मध्य प्रदेश में 24, राजस्थान में 22, ओडिशा में 4 और झारखंड में 3 जिले शामिल हैं।

125 दिन रोजगार मिलेगा
ये 116 वे जिले हैं जहां 25 हजार से ज्यादा प्रवासी मजदूर वापस आए हैं। गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत साल में 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराने की योजना है।

अभियान का बजट 50 हजार करोड़ रुपए  
सरकार ने गरीब कल्याण रोजगार अभियान का बजट 50 हजार करोड़ रुपए रखा है। कामगारों को स्किल के हिसाब से 25 काम दिए जाएंगे। इनमें सड़क, ग्रामीण आवास, बागवानी, पौधारोपण, जल संरक्षण और सिंचाई, आंगनवाड़ी, पंचायत भवन और जल जीवन मिशन जैसे काम शामिल हैं। इस अभियान को लागू करने से पहले सरकार ने स्किल मैपिंग की है। 

किस राज्य में कितने प्रवासी मजदूर लौटे  
उत्तर प्रदेश: 35 लाख से ज्यादा
मध्यप्रदेश: 25 लाख से ज्यादा  
बिहार: 15 लाख से ज्यादा  
झारखंड:  2 लाख से ज्यादा
राजस्थान: 10 लाख से ज्यादा
ओडिशा: एक लाख से ज्यादा

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