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परीक्षा के मोदी मंत्र / पीएम मोदी ने कहा, नाकामी ही सफलता का रास्ता दिखाती है, लेकिन रुके नहीं, जो रुका वो फेल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार ‘परीक्षा पे चर्चा 2020’ कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में एक घंटे 52 मिनट बात की। कार्यक्रम में दुनिया के 27 देशों से 30 करोड़ से अधिक छात्र जुड़े। 10वीं, 11वीं और 12वीं के छात्रों ने पीएम मोदी से परीक्षा की तैयारी, तनाव और करियर से जुड़े सवाल पूछे। कार्यक्रम की थीम थी #विदाउट फिल्टर यानी जैसे दोस्तों से बात करते हैं वैसे ही करेंगे। प्रधानमंत्री ने चंद्रयान-2 की नाकामी का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि विफलता दिखाती है कि आप सफलता की ओर बढ़ गए। राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण और अनिल कुंबले के उदाहरण से समझाया कि कैसे उनके खेल ने बाकी खिलाड़ियों को मोटिवेट कर दिया।

छात्रों के सवाल और पीएम मोदी के जवाब

पहला सवाल : मैं बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रही हूं कैसे बिना तनाव के परीक्षा का सामना कैसे करूं और मूड खराब न हो, इसके लिए क्या करूं? – यशस्वी राजस्थान

मोदी मंत्र : क्या कभी सोचा है कि मूड ऑफ कैसे होता है। इसकी वजह हम हैं या कोई दूसरा। ज्यादातर मामलों में मूड ऑफ होने की वजह बाहर परिस्थितियां होती हैं। इसे एक उदाहरण से समझें। एक बच्चा मांसे कहता है मैं पढ़ रहा हूं और मुझे 6 बजे चाय देना। पढ़ाई के दौरान वह बीच-बीच में घड़ी देखता है वहीं से गड़बड़ शुरू होती है। फिर मां को देर हो जाती है तो वहीं से मूड खराब होना शुरू हो जाता है। इसी को समझने का एक और तरीका है। ऐसा होने पर सोचिए, मां इतनी मेहनत करती है जरूरत कुछ हुआ होगा कि वह 6 बजे चाय नहीं ला पाईं। पता करें कि मां को दिक्कत तो नहीं है। अगर ऐसा करते हैं तो मूड चार्ज हो जाएगा। इसलिए अपेक्षा कम रखें। 

दूसरा सवाल : परीक्षा में अच्छे अंक के लिए हम कितनी मेहनत करें और क्या जीवन में सफलता का मापदंड परीक्षा ही है। मयंक, उत्तराखंड

मोदी मंत्र : ज्यादातर बच्चे यही सोचते हैं। कुछ परीक्षाओं के अंक जीवन के टर्निंग पॉइंट बन गए हैं। मां-बाप भी बच्चे पर कुछ परीक्षाओं में अंक हासिल करना का दबाव बनाते हैं। पहली 10वीं, 12वीं फिर एंट्रेंस एग्जाम। आज दुनिया में संभावनाएं बढ़ गई हैं। सिर्फ परीक्षा के अंक हीह जिंदगी नहीं है। कोई एक परीक्षा पूरी जिंदगी नहीं है यह एक पड़ाव है। यही सबकुछ है यह नहीं मानना चाहिए। बहुत सारा स्कोप है जीवन के किसी भी क्षेत्र में जा सकते हैं। इसे ऐसे समझें कि एक किसान की स्कूली शिक्षा कम हुई है लेकिन तकनीक से वह अपने जीवन को कितना बेहतर बना देता है। इसीलिए परीक्षा का महत्व है लेकिन परीक्षा ही जिंदगी नहीं है।

तीसरा सवाल : पढ़ाई साथ एक्स्ट्रा-करिकुलर गतिविधियों से कैसे तालमेल बनाएं। – प्रजक्ता अतंककर, केंद्रीय विद्यालय-जबलपुर, रिया नेगी, गवनर्मेंट गर्ल्स सीनियर सेकंड्री स्कूल-दिल्ली, अनामिका भूनिया, जवाहर नवोदय विद्यालय-कोलकाता

मोदी मंत्र : हम शिक्षा व्यवस्था से जो शिक्षा प्राप्त करते हैं वो दुनिया के दरवाजे खोलने का रास्ता होती हैं। जैसे जब बच्चा अल्फाबेट सीखता सीखकर नई दुनिया में प्रवेश करने की तैयारी करता है। धीरे-धीरे वह सब सीख जाता है। हमारी पूरी शिक्षा वो है हमे कुछ करने और जानने के लिए अवसर देती है, हमे उसी को आधार बनाते हैं तो आगे बढ़ते हैं। हम रोज जो सीखते हैं उसे टीचर की नहीं जिंदगी की कसौटी पर कसना चाहिए। अगर कक्षा में पढ़ा गया कि ‘कम बोलने पर फायदा होता है’ तो सोचना चाहिए मां-बाप की बहस के दौरान पर यह बात काम आएगी क्या। अगर आप एक्स्ट्रा एक्टिविटी नहीं करते हैं तो आप रोबोट बनकर रह जाएंगे। क्या चाहते हैं कि नौजवान रोबोट बन जाएं। हमारा नौजवान साहत और सामर्थ दिखाने वाला नहीं होगा तो क्या होगा। समय का मैनेजमेंट करना चाहिए लेकिन एक्स्ट्रा एक्टिवटी से दूरी नहीं बनानी चाहिए। पेरेंट्स बच्चों पर नई चीजों का दबाव डालने की जगह उन्हें उनकी रुचि को समझकर वो ही काम सीखने में मदद करें। उन्हें उनकी पसंद की किसी न किसी एक्टविटी से जोड़ें। 

चौथा सवाल : सवाल : विज्ञापन और तकनीक छात्र के जीवन में किस तरह मददगार साबित होते हैं। – केदिव्या, गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकंड्री सकूल-अंडमान, दीपेश, नेमटी सीनियर सेकंड्री स्कूल-सिक्किम

मोदी मंत्र : स्मार्टफोन आपका समय चोरी करता है उसमें रोजाना 10 मिनट कम करके यह समय दादा-दादी, पेंरेंट्स के साथ बिताएं तो तकनीक ज्यादा फायदेमंद साबित होगी। तकनीक हमें नहीं हम तकनीक को कब्जे में रखें, ऐसी सोच बनाएं। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि रेलवे की पूछताछ की विंडो पर इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन लगी है लेकिन फिर भी कई यात्री लाइन लगाकर ट्रेन की जानकारी हासिल करते हैं और तकनीक का फायदा नहीं उठाते। ऐसे मौकों पर तकनीक का फायदा उठाना चाहिए जैसे आज की पीढ़ी करती है। घर से ही गूगल से पूछते हैं कि कौन सी ट्रेन देरी से चल रही है। ये तय करें कि तकनीक का कितना इस्तेमाल करना है। तय करें कि मोबाइल की मदद से रोजाना 10 नए शब्द सीखेंगे। रोजाना एक तय समय निकालें और खुद को तकनीक से दूर रखें। इस टेक्नोलॉजी फ्री ऑवर को फॉलो करें। 

पांचवा सवाल : देश के नागरिकों को उनके कर्तव्य कैसे याद दिलाएं? तापी अकू, अरुणाचल प्रदेश, शैलेश कुमार, केन्द्रीय विद्यालय, तमिलनाडु, गुनाक्षी शर्मा, महाराजा अग्रवाल विद्यालय, गुजरात

मोदी मंत्र : ज्यादातर लोग सोचते हैं कि कर्तव्य और अधिकार अलग हैं जबकि ये एक ही हैं। कर्तव्य में ही अधिकार शामिल होते हैं। जैसे अगर मैं शिक्षक का कर्तव्य निभाता हूं तो बच्चों के अधिकार की रक्षा होती है। गांधी कहते हैं मूलभूत कर्तव्य होते हैं अधिकार नहीं। देश को आगे बढ़ाने के लिए अपने कर्तव्य निभाएं। अगर हम अपने कर्तव्य निभाएं तो किसी को अधिकार मांगने नहीं पड़ेंगे, क्योंकि कर्तव्य से ही अधिकार संरक्षित होंगे। राष्ट्र के लिए हमें कुछ कर्तव्य निभाने चाहिए। 2022 आजादी के 75 साल होंगे। हमें 2047 में आजादी के 100 साल होंगे। जब आजादी के 100 साल होंगे। तो आप कहां होंगे? आप कहीं न कहीं लीडरशिप में होंगे। आज जो 10वीं-12वीं के विद्यार्थी 2047 में लीडरशिप की पोजिशन में होंगे। जब आप लीडर होंगे, तब आपको बिल्कुल टूटी-फूटी व्यवस्था मिल जाए तो कैसा लगेगा। इस देश के लिए कई लोगों ने अपनी जान की बाजी लगा दी। कुछ अंडमान-निकोबार की जेल में बंद रहे। मैं देश के लिए कर्तव्य निभा सकूं, उन कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। 
क्या हम यह फैसला कर सकते हैं कि हमें आगे मेड इन इंडिया खरीदेंगे। इससे देश की इकोनॉमी को ताकत मिलेगी। अगर पटाखे भी बाहर से लाकर धमाका करेंगे तो क्या होगा। मैं बिजली फालतू नहीं जाने देता, पानी नहीं बहने देता, बिना टिकट ट्रेन में सफर नहीं करता। अगर हर हिंदुस्तानी यह करे, तो बहुत कुछ बदल सकता है। हम लोग जब पढ़ते थे, तो नागरिक शास्त्र पढ़ाया जाता था, अब वो नहीं पढ़ाया जाता। लेकिन हमें नागरिक के तौर पर जिम्मेदारियां निभानी चाहिए। एयरपोर्ट पर हम कतार नहीं तोड़ते, क्योंकि वह हमारे अनुशासन का हिस्सा है। अगर यही अनुशासन सब के जीवन में आ जाता है, तो बहुत कुछ बदल सकता है।

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Written by Bhanu Pratap

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