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भारत बंद / सरकार की आर्थिक नीतियों का विरोध: बंगाल के कांचरापाड़ा में रेल रोकी, ममता ने कहा- आंदोलन के नाम पर पथराव करना दादागीरी

  • 16 मांगों को लेकर हो रहा आंदोलन, भारत बंद में बैंकिंग, कोयला, तेल, डिफेंस, पब्लिक सेक्टर और ट्रांसपोर्ट क्षेत्र के कर्मचारी शामिल होंगे
  • पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा- लेफ्ट के बंद को लोगों ने नकारा, सस्ती लोकप्रियता के लिए बसों पर बम फेंक रहे हैं
  • शिवसेना ने मुखपत्र सामना में लिखा- भाजपा सरकार के नोटबंदी-जीएसटी जैसे फैसलों ने उद्योगों-कर्मचारियों का नुकसान किया
  • राहुल गांधी का ट्वीट- मोदी सरकार की जन-विरोधी नीतियों ने बेरोजगारी को बढ़ावा देकर सार्वजनिक उपक्रमों को कमजोर किया|

लखनऊ/ भोपाल/ जालंधर. ऑल इंडिया ट्रेड यूनियंस ने आज भारत बंद का ऐलान किया है। इसका असर देश के कुछ हिस्सों में देखने को मिला। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापाड़ा में प्रदर्शनकारियों ने रेलवे ट्रैक बंद कर दिया, जबकि सिलीगुड़ी में उत्तर बंगाल स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के बस ड्राइवरों ने हेलमेट पहनकर गाड़ी चलाई। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “सीपीआईएम की कोई विचारधारा नहीं है। रेलवे ट्रेक पर बम रखना ‘गुंडागर्दी’ है और आंदोलन के नाम पर यात्रियों को पीटना या पथराव करना ‘दादागीरी’ है। यह आंदोलन नहीं है, मैं इसकी निंदा करती हूं।”

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कल भारत बंद, सेंट्रल बैंक की ओर से भेजा गया हड़ताल का एसएमएस

भारत बंद को भारतीय व्यापार संघ, ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर, हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), स्व-रोजगार महिला संघ, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन शामिल हैं। इसके अलावा (एलपीएफ), यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एआईसीसीटीयू), इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आईएनटीयूसी) और ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर ने समर्थन दिया है। हड़ताल में 25 करोड़ कर्मचारियों के शामिल होने का अनुमान है।

अपडेट्स

  • मुंबई: शिवसेना ने ट्रेड यूनियन के भारत बंद को समर्थन दिया। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’के मुताबिक, भाजपा सरकार के पहले कार्यकाल ने उद्योग और कर्मचारी वर्ग को खासा नुकसान पहुंचाया है। इसका कारण सरकार के नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसले रहे हैं। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के कर्मचारियों ने भारत पेट्रोलियम में विनिवेश के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया।
  • दिल्ली: राहुल गांधी का ट्वीट-  मोदी-शाह सरकार की जन-विरोधी नीतियों ने विनाशकारी बेरोजगारी को बढ़ावा देकर हमारे सार्वजनिक उपक्रमों को कमजोर किया है। आज 25 करोड़ कर्मचारी हड़ताल पर हैं। मैं उन सभी को सलाम करता हूं।
  • तमिलनाडु: चेन्नई में माउंट रोड पर कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। 
  • उत्तर प्रदेश: पब्लिक सेक्टर बैंकों, बीएसएनएल, डाक और एलआईसी समेत कई दफ्तरों में कामकाज ठप। हड़ताल को अखिल भारतीय राज्य सरकार कर्मचारी महासंघ और महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ का भी समर्थन।
  • हरियाणा: पुलिस की मौजूदगी में हरियाणा रोडवेज के अलग-अलग डिपो में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। लेकिन, इस बीच भी बसें चल रही हैं। गुड़गांव में रोडवेज की 66 बसें, भिवानी में 10 बसें और सिरसा डिपो से 5 बसें चली हैं। कैथल रोडवेज जीएम ने दावा किया है कि 115 बसें चली हैं। 
  • पंजाब: जालंधर में हड़ताल का असर। वाम संगठनों ने इंडस्ट्रियल एरिया फोकल प्वाइंट एक्सटेंशन की रोड ब्लॉक की। भारतीय जीवन बीमा निगम के कार्यालय पर भी कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। जालंधर में कर्मचारियों ने प्रदर्शन में सड़क को बंद कर दिया। अमृतसर में रेले रोकी।
  • केरल: तिरुवनंतपुरम में ट्रेड यूनियन सदस्यों ने रैली निकाली।

ममता ने कहा- लेफ्ट के बंद को लोगों ने नकार दिया

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा- लेफ्ट पार्टियों के पहले बुलाए गए बंद लोगों ने नकार दिए। अब वे सस्ती लोकप्रियता के लिए बसों पर बम फेंक रहे हैं। इस तरह के हथकंडे अपनाने से तो राजनीतिक मौत बेहतर है। उन्होंने कहा, “सीपीआईएम की कोई विचारधारा नहीं है। रेलवे ट्रेक पर बम रखना ‘गुंडागर्दी’ है और आंदोलन के नाम पर यात्रियों को पीटना या पथराव करना ‘दादागीरी’ है। यह आंदोलन नहीं है, मैं इसकी निंदा करती हूं।”

249 किसान संगठन और 80 विद्यार्थी संगठनों का बंद को समर्थन

किसानों के मुताबिक, देशभर में 249 किसान संगठन और 80 विद्यार्थी संगठनों ने इस बंद को समर्थन दिया। ऑल इंडिया संघर्ष कमेटी की घोषणा के मुताबिक गांवों से दूध, सब्जी-फल की सप्लाई प्रभावित हुई। मध्य प्रदेश में सेंट्रल बैंक ने एसएमएस भेज कर ग्राहकों को हड़ताल की जानकारी दी। उप्र में जेईई मेन 2020, यूपी टीईटी 2019 और आईसीएआर नेट 2020 प्रवेश परीक्षाएं भी प्रभावित हुईं।

कर्मचारियों की ये हैं मांगें

  • सभी के लिए न्यूनतम वेतन 21 हजार प्रति माह से कम न हो और इसे मूल्य सूचकांक से जोड़ा जाए 
  • स्थायी/ बाहर मासी कामों के लिए ठेका प्रथा बंद हो। ठेका / संविदा / आउटसोर्सिंग कर्मचारी, जो नियमित कर्मचारी का कार्य कर रहे हैं उन्हें नियमित किया जाए। जब तक उन्हें नियमित नहीं किया जाता नियमित कर्मचारियों के बराबर वेतन भत्ता दिया जाए। 
  • बोनस और और प्रोविडेंट फंड की अदायगी पर से सभी बाध्‍यता सीमा हटायी जाए। ग्रेच्‍युटी का भुगतान 45 दिन प्रतिवर्ष के हिसाब से किया जाए।
  • सबके लिए पेंशन सुनिश्चित किया जाए। ईपीएफओ द्वारा सभी को एक हजार की जगह कम से कम दस हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाए। 
  • केंद्रिय राज्‍य सरकार के कर्मचारियों की पुरानी पेंशन नीति को बहाल किया जाए। केंद्र व राज्‍य कर्मचारियों को एक समान वेतन व भत्‍ते दिए जाए। 
  • रोजगार सृजन के लिए ठोस कदम उठाया जाए। केंद्र व राज्‍य सरकार के रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती किया जाए। नियमित प्रकृति के कार्यों में कार्यरत सभी उद्योग के संविदा आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को नियमित किया जाए और कार्य के आधार पर आवश्यकतानुसार नई भर्ती की जाए, ताकि बेरोजगारी दूर हो। स्थाई प्रकृति के काम पर स्थाई कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए। 
  • महंगाई पर रोक लगाने के लिए योजना बनाई जाए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत किया जाए एवं खाद्य पदार्थों पर वायदा कारोबार पर रोक लगाई जाए। 
  • श्रम कानून को सख्ती से लागू किया जाए। श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संशोधनों को वापस किया जाए असंगठित क्षेत्र के लिए क्या मजदूरों के लिए क्षेत्र के मजदूरों के लिए सर्वव्यापी सर्वव्यापी सामाजिक सुरक्षा कानून बनाया जाए एवं राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कोष का निर्माण किया जाए।

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Written by Bhanu Pratap

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