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शादीशुदा जिन्दगी में पर्सनल स्पेस होना चाहिए या नही?

पति पत्नी और पर्सनल स्पेस

शादी, जिसमे व्यक्तिगत रूप से दो अलग इन्सान एक रिश्ते में बंधते हैं, जो खुद के साथ दो परिवारों को भी जोड़ते है. कई परिवार नए रिश्ते बनाते है और कई पुराने रिश्तों को मजबूत करते हैं। अरेंज मैरिज हो या लव मैरिज दोनों में ही दो लोग अपने अलग-अलग माहौल, परवरिश, और परम्पराओं से आते हैं जो उन्हें व्यक्तिगत तौर पर अलग बनाती है। उनकी आदतें, पसंद-नापसंद, विचार, रूचि, दृष्टिकोण, एक – दूसरे से कई बिंदुओं पर अलग या एक जैसे भी हो सकते है।

पर्सनल स्पेस की जरूरत कब महसूस होती है

इन विषमताओं के रहते एक नए परिवार में, नये रीती-रिवाजों में, नये लोगों, नये रिश्तों में खुद को ढालना दोनों के लिए थोड़ा मुश्किल होता है। इसलिए शुरुआती दौर एक-दूसरे को, इन नये रिश्तों को समझने में, नयी जिम्मेदारियों को निभाने में निकल जाता है, इसलिए शायद उस समय पर्सनल स्पेस की जरूरत महसूस न हो लेकिन जैसे-जैसे रिश्ता आगे बढ़ता है, वैसे-वैसे पर्सनल स्पेस का महत्व बढ़ जाता है।

पर्सनल स्पेस आखिर है क्या बला?

यहाँ पर्सनल स्पेस का मतलब रिश्ते में एक साथ रहने के बाद भी खुलकर जीने की आजादी से है और पर्सनल स्पेस देने का मतलब एक – दूसरे को खुद के लिए वक्त देने से है। ऐसा इसलिए क्योंकि भले ही दो लोग शादी के एक बंधन में बंधे हो लेकिन वे हैं तो “दो इन्सान”, जहाँ दोनों की अलग सोच और अलग पसंद भी है और दोनों का जीवन जीने का तरीका भी अलग हो सकता है। ऐसे में एक-दूसरे को खुद के लिए वक्त देना यह दर्शाता है कि आप दोनों एक- दूसरे के व्यक्तित्व (Individuality) का सम्मान करते है और आप दोनों एक दूसरे बराबर मानते हैं।

हालाँकि आज की कामकाजी जिंदंगी में अपने परिवार, और एक- दूसरे के लिए ही समय निकालना मुश्किल हो जाता है, ऐसे में एक-दूसरे को खुद के लिए समय देना और भी मुश्किल होता है, लेकिन फिर भी थोड़ा सा पर्सनल स्पेस देना, दो इंसानों के रिश्ते में एक नयेपन के साथ परस्पर सम्मान की भावना को भी मजबूत करता है।
पर्सनल स्पेस रिश्ते में क्या रोल प्ले कर सकता है –

क्या पर्सनल स्पेस वाकई काम करता है?

• ‌पर्सनल स्पेस मानसिक तनाव और भावनात्मक थकान को कम करने में मदद कर सकता है।
• ‌पर्सनल स्पेस आपको एक नया माइंडसेट देता है जो रिश्ते को आगे बढ़ाने में, फ्यूचर प्लानिंग करने में मदद कर सकता है।
• ‌पर्सनल स्पेस रिश्ते को मजबूत करता है और एक- दूसरे के प्रति सम्मान को बढ़ाता है।
• ‌आप एक -दूसरे की भावनात्मक जरूरतों को समझ सकते है। आप खुद क्या चाहते है और अपने पार्टनर से क्या उम्मीद रखते है, यह सब खुद को समय देने से स्पष्ट हो जायेगा, जिससे दोनों के बीच कोई वैचारिक टकराव नहीं रहेगा।
• ‌पर्सनल स्पेस रिश्ते का संतुलन बनाये रखने में मददगार होता है।
• ‌ पर्सनल स्पेस रिश्ते में उत्साह को बढ़ाता है, क्योंकि व्यक्ति जब खुद की पसंद का कोई काम करता है तो उसे

रूहानी ख़ुशी मिलती है और वह सबको खुश रखता है, जिससे रिश्ते खुशनुमा रहते है।

इसलिए पति और पत्नी दोनों को ही एक- दूसरे को पर्सनल स्पेस देना चाहिए। हालाँकि पर्सनल स्पेस की जरूरत कई बातों से तय होती है। परिवार, उम्र, वर्ग, समाज, आर्थिक स्थिति के आधार, रिश्ते में पर्सनल स्पेस की जरुरत और सीमा को तय करते है। लेकिन बदलते दौर में, शादी में पर्सनल स्पेस देना जरूरी है क्योंकि शादी दो अलग व्यक्तित्व को एक करती है और पर्सनल स्पेस देने के लिए दोनों को एक – दूसरे के व्यक्तित्व को समझना जरूरी है।

लेखक – रुपाली गुर्जर, मनोप्रकृति इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइकोलॉजी, इंदौर

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Written by Aviral Jain

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