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बंगाल की झांकी नामंजूर, तृणमूल का आरोप- सीएए पर विरोध के कारण केंद्र ने हमसे भेदभाव किया

  • राज्य सरकार ने इस बार झांकी की थीम विकास कार्य, जल और पर्यावरण संरक्षण रखी थी
  • रक्षा मंत्रालय ने कहा- चयन समिति के पास दो बार प्रस्ताव गया, लंबी चर्चा के बाद इसे खारिज किया गया
  • विशेषज्ञ समिति झांकियों को थीम, कॉन्सेप्ट, डिजाइन और विजुअल इम्पैक्ट के पैमाने पर जांचती है

केंद्र सरकार ने 26 जनवरी को होने वाली गणतंत्र दिवस की परेड में प. बंगाल की झांकी को शामिल नहीं किया है। इसे विकास कार्यों, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण की थीम पर बनाया गया था। रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि बंगाल सरकार की झांकी का प्रस्ताव विशेषज्ञ समिति के पास 2 बार गया। दूसरी बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद इसे खारिज कर दिया गया। इस फैसले को तृणमूल सांसद सौगत राय ने भेदभावपूर्ण बताया है। इससे पहले 2018 में भी बंगाल की झांकी का चयन नहीं हुआ था।

मंत्रालय ने बताया, “विशेषज्ञ समिति रक्षा मंत्रालय को अपनी सिफारिश भेजने से पहले विभिन्न राज्यों की झांकी के प्रस्तावों को थीम, कॉन्सेप्ट, डिजाइन और विजुअल इम्पैक्ट के पैमाने पर जांचती है। पश्चिम बंगाल की झांकी को पिछले साल के गणतंत्र दिवस परेड के लिए इसी तरह की प्रक्रिया बाद चुना गया था और इस बार भी उसी पैमाने पर परखा गया।” इस साल के लिए बंगाल ने राज्य में विकास कार्यों, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण की थीम पर आधारित झांकी का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन, दूसरे दौर की बैठक के बाद अस्वीकार कर दिया गया।”

सीएए पर विरोध के कारण केंद्र ने यह कदम उठाया: तृणमूल सांसद

तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने केंद्र पर भेदभाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “गणतंत्र दिवस परेड के लिए पश्चिम बंगाल की झांकी को बाहर करना भेदभावपूर्ण है। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि बंगाल सीएए, एनआरसी और एनपीआर को लेकर केंद्र सरकार के फैसले का लगातार विरोध कर रहा है। बंगाल ऐसा राज्य है जो अपनी कला-संस्कृति, संगीत और अन्य विधाओं के लिए जाना जाता है। इसलिए, केंद्र सरकार द्वारा बंगाल के खिलाफ इस प्रकार का कदम उठाना पक्षपातपूर्ण है।”

पिछले साल भी बंगाल का प्रस्ताव ठुकराया गया था
पिछले साल भी केंद्र ने बंगाल का प्रस्ताव ठुकराया था। इसमें राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही कन्याश्री योजना को प्रदर्शित करने के प्रस्ताव भेज गया था। बाद में, राज्य सरकार ने महात्मा गांधी के जीवन के दो प्रमुख पहलुओं पर आधारित झांकी का प्रस्ताव दिया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। इस झांकी में भारत की स्वतंत्रता के महत्वपूर्ण मोड़ के दौरान गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के साथ उनके कोलकाता प्रवास को दर्शाया गया था। 2017 में बंगाल ने ‘एकता ही भाईचारा’ विषय पर झांकी का प्रस्ताव दिया था जिसे अस्वीकार कर दिया गया था।

2020 के गणतंत्र दिवस समारोह में 22 झांकियां प्रदर्शित होंगी
गणतंत्र दिवस की परेड में जो झांकियां शामिल होती हैं, उनका चयन एक लंबी प्रक्रिया के बाद होता है। इसमें रक्षा मंत्रालय की तरफ से राज्यों, मंत्रालयों और विभागों से प्रस्ताव आमंत्रित किए जाते हैं। मंत्रालय द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति इन प्रस्तावों पर कई दौर की बैठक करती है और अंत में अपनी सिफारिश मंत्रालय को सौंपती है। 2020 के परेड समारोह के लिए कुल 56 झांकियों के प्रस्ताव आए थे, जिनमें से 22 को चुना गया है। समय की बाध्यता को देखते हुए सीमित संख्या में ही झांकियों का चयन होता है। ब्राजील के राष्ट्रपति जैर बोल्सोनारो समारोह के मुख्य अतिथि होंगे।

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