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दुनिया के सबसे अमीर शहर में कचरे की थैली के मास्क

अस्पतालों में बेड की कमी, एक वेंटिलेटर पर चार मरीज रखे गए.

न्यूयॉर्क इतिहास की सबसे खतरनाक महामारी से जूझ रहा है। शहर के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने दैनिक भास्कर को बताया कि अकेले गुरुवार को ही 85 लोगों की मौत कोरोनावायरस से हो चुकी है। अभी तक 40 हजार लोग अकेले न्यूयॉर्क शहर में कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। हालात इतने खराब हो गए हैं कि स्थानीय प्रशासन को सेना बुलानी पड़ी है। 100 से ज्यादा अरबपतियों वाले इस शहर के अस्पतालों में इतनी तादाद में मरीज आने लग गए हैं कि बेड की कमी हो गई है। पर्याप्त वेंटिलेटर भी नहीं हैं। कुछ अस्पतालों ने तो एक वेंटिलेटर पर दो मरीजों को रखा है। एक डॉक्टर मार्को गरोन ने ट्विटर पर ऐसे ही वेंटिलेटर की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा है कि अब डॉक्टरों के सामने यह दुविधा है किसे वेंटिलेटर सुविधा दी जाए और किसे नहीं, जबकि सच्चाई यह है कि सबको इसकी जरूरत है। आने वाले समय में स्थिति और गंभीर होने की संभावना है। इसी वजह से फूड और ड्रग्स प्रशासन ने आपातकाल की स्थिति में इस्तेमाल होने वाले उपकरण वेस्पर को कोरोना मरीजों के लिए उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। इस उपकरण के जरिए एक वेंटिलेटर चार मरीजों को सांस लेने में मदद करता है।

 अस्पतालों मे सुविधाओं की भी कमी
मामला सिर्फ वेंटिलेटर तक सीमित नहीं है। अस्पतालों में बिस्तर, डॉक्टर, नर्स और मूलभूत उपकरणों की भयानक कमी हो गई है। मेडिकल सप्लाई की कमी की वजह से स्वास्थ्य कर्मचारियों को फेसमास्क रिसाइकल करके इस्तेमाल करना पड़ रहा है, वहीं इनमें से कुछ लोगों को कचरा डालने वाला बैग मास्क के तौर पर इस्तेमाल करना पड़ रहा है। यहां तक की न्यूयॉर्क के अस्पतालों में जहां भी खाली जगह मिल रही है, वहां बिस्तर लगाना शुरू कर दिया गया है। न्यूयॉर्क स्टेट नर्स एसोसिएशन के डायरेक्टर पैट केन ने बताया कि स्थिति इतनी गंभीर है कि बयान नहीं किया जा सकता है। अस्पताल के चप्पे-चप्पे पर मरीजों के लिए बिस्तर लगाया जा रहा है। यहां तक कि अस्पताल के आसपास सार्वजनिक स्थानों का भी इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है ताकि अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके। बुधवार-गुरूवार के बीच कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या में 30% का इजाफा हुआ है। 

55% कोरोना के मरीज 50 साल से कम उम्र के
एक आंकड़े ने न्यूयॉर्क शहर के लोगों में सिहरन फैला दी है। 55% कोरोना के मरीज 50 साल से कम उम्र के हैं। हालांकि मरने वाले ज्यादातर मरीज 60 साल से ऊपर के हैं। इनमें डायबिटीज, अस्थमा, कैंसर जैसी बीमारियों के मरीज भी हैं। 18-44 साल के 16 लोगों की मौत हुई है। डॉक्टरों की कमी को देखते हुए न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज ने अपने स्टूडेंट्स को समय से 3 महीने पहले ही पास करने का फैसला लिया है। इसके बावजूद ये स्टूडेंट्स एक जुलाई से ही इलाज शुरू कर पाएंगे। सरकार भी कन्वेंशन सेंटर, ऑडिटोरियम और यूनिवर्सिटी कैंपस जैसी जगहों को अस्पताल में तब्दील करने के लिए मजबूर हो गई है। जैकब के जबिटास कन्वेंशन सेंटर जहां हर साल इस समय न्यूयॉर्क ऑटो शो हुआ करता था, उसे सरकार अस्पताल में तब्दील कर रही है। आर्मी भी यहां 1 हजार बेड का अस्पताल बनाने में मदद कर रही है।

दैनिक भास्कर से बात करते हुए न्यूयॉर्क के मेयर बिल डे ब्लासियो ने बताया कि न्यूयॉर्क जेल से 70 साल से ऊपर के ऐसे कैदी, जिनके खिलाफ कोई जघन्य मामला नहीं है, उन्हें रिहा किया जा रहा है। गौरतलब है कि ट्विटर पर मौली ग्रिफर्ड नाम के एक वकील ने, जो न्यूयॉर्क लीगल ऐड के लिए काम करते हैं, गुरुवार को एक ग्राफ पोस्ट किया है जिससे पता चलता है कि प्रति हजार व्यक्ति कोरोना वायरस के मरीजों का अनुपात न्यूयॉर्क के जेलों में सबसे तेजी से बढ़ा है। शहर के दमकल कर्मचारी भी इस वायरस के चपेट में हैं।

300 पुलिस अधिकारी भी कोरोना पॉजिटिव 

170 दमकल कर्मी और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में 200 से अधिक कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। अकेले गुरुवार को न्यूयॉर्क पुलिस विभाग के 3674 अधिकारी बीमारी के कारण छुट्टी पर थे और इनमें से 300 कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। लोगों में डर इतना ज्यादा है कि टाइम स्क्वैयर जैसी जगह जहां किसी आम दिन चलना भी मुश्किल होता है वो सुनसान है। लोगों अपने पास आता हुआ देखकर उनसे दूर भाग रहे हैं। 

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