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दुनिया में घड़ियालों की संख्या में मप्र की चंबल पहले और बिहार की गंडक नदी दूसरे नंबर पर

  • वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों ने 14 दिनों तक नदियों में बोट से किया सर्वे
  • चंबल में 1255, जबकि गंडक में 251 घड़ियाल, नेपाल, बांग्लादेश व भारत में पाए जाते हैं घड़ियाल.

अतिसंकट ग्रस्त प्राणियों में आने वाले घड़ियालों की संख्या इतनी हो गई है कि बिहार की गंडक नदी इनकी संख्या के मामले में अब दुनिया में दूसरे नंबर पर पहुंच गई है। पहले नंबर पर मध्यप्रदेश की चंबल नदी है। वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) की ओर से वर्ष-2019 में सोनपुर से वाल्मीकि नगर तक करीब 325 किमी लंबी गंडक नदी में 14 दिनों तक किए गए सर्वे में यह तथ्य सामने आया है।

रिपोर्ट के मुताबिक गंडक में 251 घड़ियाल देखे गए हैं, जबकि मध्यप्रदेश के चंबल नदी में 1255 हैं। गंडक में घड़ियालों की संख्या पिछले तीन वर्षों में दोगुनी से ज्यादा हो गई है। वर्ष 2017 में यहां करीब 119 घड़ियाल देखे गए थे। तीसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश की गिरवा नदी है। यहां 143 घड़ियाल हैं। चाैथे नंबर पर उत्तराखंड के रामगंगा नदी जलाशय है। इसमें 90 घड़ियाल है। पांचवें नबंर पर नेपाल की नारायणी नदी है। नारायणी में 84 है। वहीं नेपाल की राप्ती में 82 घड़ियाल हैं।

ऐसे किया गया सर्वे

विभिन्न संगठनों के विशेषज्ञों ने भारत, नेपाल अाैर बांग्लादेश की नदियाें में बोट से घड़ियालों पर फरवरी-2019 में सर्वे शुरू किया था। तीनों देशों में घड़ियालों के अंडे देने की 14 जगहों को देखा गया, जिनमें गंडक नदी में पांच जगह भी शामिल थे।

सिर्फ गंडक में ही क्यों

बिहार में सिर्फ गंडक नदी में ही घड़ियाल पाया जाता है। क्योंकि इसका पानी साफ है। यानी प्रदूषण का स्तर बहुत कम है। घड़ियालों के अंडे देने के बाद 60 % सुरक्षित रहते हैं। हालांकि नदी में पानी का स्तर बढ़ने से कटाव के कारण 40% खराब हो जाते हैं। मार्च-अप्रैल में घड़ियाल अंडे देते हैं।


घड़ियाल की अहमियत

डब्ल्यूटीआई के उप निदेशक डॉ. समीर कुमार सिन्हा ने बताया कि घड़ियाल तेज धार, साफ पानी और मछलियों की उपलब्धता वाली नदियों में पनपते हैं। मानवीय खतरों के कारण घड़ियाल विलुप्ति के कगार पर हैं। नदी-तंत्र में संतुलन बनाए रखने में ये महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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