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क्या है अरविंद केजरीवाल की Exit Poll वाली जीत में छिपा राजनीतिक संदेश?

Exit Poll के नतीजे देखकर तो ऐसा ही लग रहा है कि दिल्ली में मुफ्त Offers वाली राजनीति..बाकी सभी मुद्दों पर भारी पड़ी है

दिल्ली के लिए शनिवार का का दिन बहुत बड़ा था. दिल्ली में शनिवार विधानसभा चुनावों के लिए वोटिंग हुई और उसके बाद पूरा देश जानना चाहता था कि दिल्ली के दिल में क्या है? शनिवार को दिल्ली वालों का दिल किस पार्टी पर आया?

एग्जिट पोल्स के नतीजे देखकर तो ऐसा ही लग रहा है कि दिल्ली में मुफ्त ऑफर वाली राजनीति बाकी सभी मुद्दों पर भारी पड़ी है और आम आदमी पार्टी बड़े आराम से सरकार बना सकती है. ज्यादातर एग्जिट पोल्स अलग-अलग दावा कर रहे हैं, लेकिन हमने इन सभी एग्जिट पोल्स का विश्लेषण कर आपको बताया कि दिल्ली की असली तस्वीर क्या है.

जी न्यूज के महा EXIT POLL के मुताबिक, दिल्ली में आम आदमी पार्टी को 55, बीजेपी को 14 और कांग्रेस को 1 सीट मिल सकती है. पिछली बार के मुकाबले स्थिति थोड़ी बदली हुई लग रही है, लेकिन एग्जिट पोल्स के मुताबिक दिल्ली में आएगा तो केजरीवाल ही. आम आदमी पार्टी को पिछली बार 70 में 67 सीटें मिली थीं, बीजेपी को 3 सीटें और कांग्रेस को एक सीट भी नहीं मिल पाई थी.

क्या इसका मतलब ये है कि दिल्ली में शाहीन बाग़ का मुद्दा पूरी तरह फेल हो गया? ऐसा नहीं कहा जा सकता, क्योंकि अगर यह मुद्दा फेल हुआ होता तो ज्यादातर एग्जिट पोल्स में बीजेपी को 10 से 20 सीटें नहीं मिलतीं.

वोटिंग प्रतिशत की बात करें तो एग्जिट पोल्स में आम आदमी पार्टी को 52 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है. बीजेपी को 37 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं, जबकि कांग्रेस के हिस्से में 7 प्रतिशत वोट आने का अनुमान है. वर्ष 2015 में आम आदमी पार्टी को 54 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि बीजेपी को 32 प्रतिशत और कांग्रेस को सिर्फ 9 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे.

यानी मोटे तौर पर दिल्ली में आम आदमी पार्टी जबरदस्त वापसी कर सकती है, लेकिन ये भी सच है कि पिछली बार दिल्ली विधानसभा से जुड़े ज्यादातर एग्जिट पोल बहुत हद तक गलत साबित हुए थे.

वर्ष 2015 के एग्जिट पोल्स में दावा किया गया था कि आम आदमी पार्टी को 39, बीजेपी को 26 और कांग्रेस को 4 सीटें मिलेंगी, लेकिन असली नतीजे इससे बहुत अलग थे. तब सारे दावों के विपरीत आम आदमी पार्टी ने 70 में से 67 सीटें जीत ली थीं.

एग्जिट पोल के तहत वोट देकर निकले लाखों वोटर्स में से कुछ हज़ार लोगों से बात की जाती है और इसके आधार पर ये अनुमान लगाया जाता है कि ज्यादातर लोगों ने किस पार्टी को वोट डाला है. इसलिए ये एग्जिट पोल कितने सही साबित होंगे, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता.

5 प्वाइंट्स में समझें एग्जिट पोल के नतीजों का मतलब क्या है…
1-पहला प्वाइंट ये है कि टेस्ट मैच की भाषा में कहें तो आम आदमी पार्टी ने बीजेपी को Follow On देकर एक पारी और 300 रनों से हराया है, जबकि वनडे की भाषा में आम आदमी पार्टी ने 10 विकट से ये मैच जीत लिया है.

2-दूसरा प्वाइंट ये है कि दिल्ली की जनता के लिए राष्ट्रवाद, हिंदुस्तान-पाकिस्तान, मुगलों का राज़ वापस आ जाएगा. इस तरह की बातें मायने नहीं रखतीं. दिल्ली की जनता को ना तो बालाकोट एयर स्ट्राइक से कोई लेना-देना है और ना ही राम मंदिर और कश्मीर की धारा 370 से ही कोई लेना-देना है. दिल्ली की जनता अपने जीवन के संघर्ष में ही पूरी तरह से लिप्त है. दिल्ली की जनता को बड़े राष्ट्रीय मुद्दों से कोई मतलब नहीं है. दिल्ली का चुनाव स्थानीय मुद्दों पर ही लड़ा गया है और जनता ने राष्ट्रीय मुद्दों और बीजेपी को नकार दिया है. दिल्ली के लोग राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय मुद्दों पर राय तो रखते हैं, लेकिन वोट डालने बाहर नहीं निकलते.. यानी दिल्ली की जनता ने साफ किया है कि दिल्ली के लोग आलसी हैं .

3-तीसरा प्वाइंट कम वोटर टर्न आउट से जुड़ा है. दिल्ली में पिछली बार के मुकाबले करीब 10 प्रतिशत कम वोटिंग हुई है. कम वोटर टर्न आउट का मतलब है कि दिल्ली की जनता चाहती है कि जैसा है वैसा चलता रहे.

4-चौथा प्वाइंट ये है कि दिल्ली की जनता प्रयोग में नहीं संयोग में विश्वास रखती है और शाहीन बाग़ जैसे मुद्दों को नकारना इसी तरफ इशारा करता है.

5-पांचवां और आखिरी प्वाइंट ये है कि आम आदमी पार्टी का कैंपेन पॉजिटिव था, जबकि बीजेपी का चुनाव प्रचार नेगेटिव था और इस बार पॉजिटिव कैंपेन जीत गया और… नेगेटिव चुनाव प्रचार हार गया.

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