in ,

पति – पत्नी के बीच की बातें किसे बताना चाहिए?

एक सच, जिससे हर कोई सहमत होगा वो ये कि हम इन्सान सामाजिक प्राणी है, हम परिवार का और परिवारों से समाज का निर्माण करते हैं। इसी के साथ एक सच ये भी है की निर्माण के लिए प्राकृतिक रूप से दो अलग गुणों की जरूरत होती है, जैसे की इंसानी दुनियां में नर और नारी। इस असमान लेकिन अभिन्न योग से ही प्रकृति, संसार और समाज की कल्पना साकार होती है, इनके बिना सामाजिक व्यवस्थाओं की रचना तो दूर हम इनके बारे में सोच भी नही सकते।

अब हम अगर नर और नारी के संबंध के बारे में बात करें तो पति पत्नी का संबंध समाज की एक आधारीय प्रयोगशाला का सूत्र है। इन दोनों के मिलने से ही इन्सान के नए जीवन का निर्माण होता है, इन्सान को यह पता है कि दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे हैं, लेकिन जो आज का दौर है वह इस बात को समझना नहीं चाहता। जब भी आज के समय में एक दूसरे को समझने की बात आती है तो वह एक दूसरे को समझने में असमर्थ दिखाई देते हैं, जबकि उम्मीद यही करते हैं की सामने वाला हमें समझे।

इस एक तरफा उम्मीद से आपसे संबंध धीरे-धीरे बिगड़ते दिखाई देते हैं। अपने संबंध को सुधारने की कोशिशों में कमी करते हैं और संबंध दिन-ब-दिन बिगड़ते चले जाते।

एक समय ऐसा आता है जब पति पत्नी अपने मन की बात एक दूसरे से नही कह पाते, इसके कारण कई हो सकते हैं लेकिन वाजिब एक भी नही हो सकता।

आपसी बातों की क्या परिभाषा होती है

प्रकृति की सबसे सुंदर चीजों में से एक है, पति – पत्नी का रिश्ता। जो एक दूसरे के भरोसे और विश्वास का होता है, जो दोनों तरफ से बराबर नही तो लगभग बराबर होना ही चाहिए। जब कभी आप कोर्ट के प्रीमायसेस में कई शादी शुदा लोगों को एक दूसरे से टकराते और जूझते हुए देखते हैं तो इस मॉडर्न एज में यही पारस्परिक विश्वास कमजोर होता हुआ आसानी से नजर आ जाता है। जब हम अपनी खुशी और अच्छी बातें सिर्फ अपने कुछ करीबी लोगों को ही बताना सही समझते हैं तो उन्हीं से अपनी समस्याओं को क्यों नहीं बताते? जब हम यह जानते हैं कि खुशी में करीबी लोग शामिल हो सकते हैं तो हमारी समस्या में भी हो सकते हैं।

लेकिन जब हम अपनी समस्या को किसी अपने के सामने रखते हैं तो हम खुद की अच्छे से अच्छी तस्वीर को ही हम दिखाने की कोशिश करते हैं। समस्याएं सबके जीवन में आती हैं कोई भी इस दुनिया में 100% परफेक्ट नहीं होता, हर इन्सान में कुछ ना कुछ कमियां होती हैं, इसलिए हमें हमारी किसी भी प्रकार की समस्याओं के समाधान के लिए अपने अच्छे, सच्चे और समझदार लोगों का साथ ही लेना चाहिए, जो हमेशा हमारे अच्छे वक्त के साथ-साथ हमारे बुरे वक्त में भी साथ खड़े नजर आए। इन अपने लोगों की परख करना दोनों की जिम्मेदारी होती है।

पति पत्नी दोनों को एक दूसरे के आत्मसम्मान को ध्यान में रखकर भी अपने जीवन के फैसले करना चाहिए।

हमें इस दुनिया में लाने वाले हमारे माता-पिता होते हैं, हमारे कुशल जीवन की कामना करने वाले हमारे माता-पिता होते हैं, हमारी जीवन की हर एक जरूरत को पूरा करने वाले हमारे माता-पिता होते हैं, जब हमारे जीवन में किसी भी प्रकार की समस्या या खुशी हो तो हम दूसरों से पहले अपने माता-पिता को शामिल क्यों नही करते?उनसे बेहतर हमें समझने वाला और सही राह दिखाने वाला इंसान और कोई नहीं हो सकता।

यहाँ घरेलु और पारिवारिक सामंजस्य से जुड़े मुद्दों पर सलाह के लिए माता पिता को सबसे पहली चॉइस बताई गई है, लेकिन जब बात पति-पत्नी के आपसी मसले की हो, वो जो सिर्फ उनके बीच की हो तो ये बातें, कितनी भी बड़ी छोटी क्यों न हो, ये बातें किसी को नही बतानी चाहिए।

कारण साफ़ है कि – पति पत्नी के बीच की हर बात के गवाह सिर्फ वो दोनों होते हैं, दो में से एक भी कम हुआ तो किसी तीसरे के सामने किसी एक का भी पक्ष पूरे सच के साथ साबित नही किया जा सकता।

लेखिका – जीतू यादव – मनोप्रकृति इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइकोलॉजी, इंदौर

Report

What do you think?

Comments

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Loading…

0

चमत्कारः 3 घंटे पहले जन्मी बच्ची को आतंकियों ने मारी गोलियां, फिर भी बच गई जान (Pics)

कोरोना काल में इंसानियत की मिसाल, याकूब ने आखिरी समय तक नहीं छोड़ा दोस्त अमृत का साथ