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वो कौन है? किन्नर जिसकी बात कभी नही काटते

हमारे समाज में मर्द और औरत के अलावा एक और भी जेंडर (वर्ग) के लोग रहते है, जिन्हें किन्नर या हिजड़े के नाम से जाना जाता है। किन्नर सिर्फ एक व्यक्ति की ही दुनते सुनते है उसके अलावा वो किसी ओर की नही सुनते. क्या आपको पता है कि “वो कौन है? किन्नर जिसकी बात कभी नही काटते” इस लेख से हम इसी सवाल का जवाब जानने की कोशिश करेगे।

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भारत में साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें सरकारी दस्तावेज़ों में बाक़ायदा थर्ड जेंडर के तौर पर एक पहचान दी है। वो सरकारी नौकरियों में जगह पा सकते हैं। स्कूल कॉलेज में जाकर पढ़ाई कर सकते हैं। उन्हें वही अधिकार दिए हैं जो किसी भी भारतीय नागरिक के हैं।

हिजड़ा समुदाय में गुरु और शिष्य (चेले) का संबंध बहुत महत्वपूर्ण होता है। इनके समाज के कुछ क़ायदे क़ानून होते हैं जिन पर अमल करना लाज़मी है। हरेक किन्नर को अपने गुरु की उम्मीदों पर खरा उतरना पड़ता है। जो ऐसा नहीं कर पाते उन्हें ग्रुप से बाहर कर दिया जाता है। इनके सामाजिक संगठन का ये बुनियादी सिधांत है।

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किन्नर समुदाय का गुरु भी जन्म से किन्नर ही होता है। मान्यता है कि किन्नर के गुरु को इस बात का आभास हो जाता है कि उसके कौन से शिष्य की मौत कब होगी। उनकी मौत का बाद रात के समय में उनकी शव यात्रा निकाली जाती है। 

हिजड़ा समुदाय में गुरु वो होते है जो सभी हिजड़ो को स्वीकार करता है। गुरु उन्हें रोज़ी रोटी कमाने का जरिया बताता है और उन्हें रहने के लिये जगह भी देता है। जो लोग अपना लिंग बदलवाकर अपनी इच्छा से इनके ग्रुप में शामिल होना चाहते हैं, ये उनकी भी मदद करते हैं। गुरु अपने चेलो को उनकी जिम्मेदारियों से भी अवगत करता है।

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जब भी किसी नये आये व्यक्ति को हिजड़ा समुदाय का हिस्सा बनना होता है तो पहले उसे गुरु को दक्षिणा देनी पडती है। जिसके बाद गुरु अपने चेले का नया नाम रखता है। फिर नये सदस्य को गुरु समुदाय के सभी सदस्यों के परिचित कराता है और उन्हें भी समुदाय में शामिल कर लिया जाता है।

हिजड़े यह मानते है कि उनकी माँ ने तो उन्हें सिर्फ जन्म दिया है लेकिन उनके गुरु में उन्हें रहने के लिये जगह और पैसे कमाने का जरिया बताया है। इसे कारण से हिजड़े अपने गुरु को बहुत महत्व देते है और उनकी बात कभी नही काटते।

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प्रत्येक गुरु के अपने नियम और कानून होते है। उन्हें तोड़ने वाले को कड़ी सजा मिलती है। हरेक को तय रकम कमाना जरूरी होता है, ऐसा न होने पर गुरु उस हिजड़े से कोई दूसरा कम करवाता है। किन्नर अपनी सारी कमाई अपने गुरु को देते है जिसके बाद गुरु हरेक को उसकी कमाई और जरूरत के हिसाब से पैसे देता है और बचे हुए पैसे गुरु अपने ही पास रख लेता है जो बाद में जरूरत होने पर काम में लिये जाते है।

तो यह थी हिजडे या किन्नर समुदाय के गुरु और चेलो से जुडी जानकारी। आशा है की इस आर्टिकल से आपको किन्नर समुदाय के बारे में और अधिक जानने को मिला होगा। 

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Written by Pooja Patidar

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